ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में नाबालिग लड़के की किडनैपिंग और फिरौती मांगने के चर्चित मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अंब कोर्ट ने मामले में दोषी पाए गए व्यक्ति को कठोर कारावास और जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
घर से उठाया नाबालिग लड़का
जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2014 का है। उस समय पुलिस थाना अम्ब के तहत एक गांव से नाबालिग किशोर के अपहरण का मामला सामने आया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंब संदीप शर्मा की अदालत ने इसी मामले में अब दोषी को सजा सुनाई है।
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फिरौती के मांगे 12 हजार रुपये
शिकायत के अनुसार दो लोगों पर आरोप था कि उन्होंने किशोर का अपहरण कर उसे अपने कब्जे में रखा। उसके पिता से लड़के का पता बताने और उसे सुरक्षित वापस दिलाने के बदले 12 हजार रुपये की फिरौती की मांग की।
पिता ने लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित किशोर के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उसके बेटे को अगवा कर कहीं छिपा रखा है और उसकी रिहाई के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
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फिर कोर्ट पहुंचा मामला
जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 365 (अपहरण), 364-A (फिरौती के लिए अपहरण) और 34 (समान आशय) के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद साक्ष्य जुटाकर अदालत में चालान पेश किया गया और मामले की सुनवाई शुरू हुई।
दोषी को मिली कठोर सजा
मामले की पुष्टि करते हुए APP शिखा राणा ने बताया कि सभी गवाहों के आधार पर आरोपी परमजीत सिंह निवासी पन्नुआ, तरनतारन (पंजाब) को दोषी करार दिया गया है और कठोर सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोषी को पांच साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, जुर्माना ना अदा करने की सूरत में भी सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसी स्थिति में दोषी को 6 महीने का अतिरिक्त कठोर कारावासर भुगतना होग।
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समय लग सकता है, बच नहीं सकता
विदित रहे कि, करीब 12 वर्ष पुराने इस मामले में आए फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से यह संदेश भी गया है कि अपहरण और फिरौती जैसे गंभीर अपराधों में दोषियों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करता है। ऐसे मामलों में न्याय मिलने में समय लग सकता है, लेकिन अपराधी अंततः कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते।
