#अपराध

July 23, 2026

दिल्ली में 5-5 हजार में बिक रही थी हिमाचल बोर्ड की फर्जी मार्कशीट, बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा; तीन धरे

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष बोले मामले से हमारा कोई लेना देना नहीं

शेयर करें:

fake mardsheet

धर्मशाला/नई दिल्ली। दिल्ली में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) के नाम पर फर्जी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तैयार कर बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी महज ₹5,000 से ₹10,000 लेकर किसी भी व्यक्ति के नाम से फर्जी मार्कशीट और शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार कर देते थे। पुलिस को आशंका है कि गिरोह अब तक 100 से अधिक फर्जी दस्तावेज बाजार में बेच चुका है।

फर्जी ग्राहक बनकर पहुंची पुलिस, ऐसे खुला पूरा खेल

दिल्ली पुलिस को सूचना मिली थी कि शाहदरा क्षेत्र में कुछ लोग फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार कर बेच रहे हैं। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने फर्जी ग्राहक बनकर जाल बिछाया। इसके बाद जीटी रोड स्थित विकास मॉल के पास छापेमारी कर सबसे पहले आरोपी नवनीत त्यागी को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 10वीं और 12वीं की कथित फर्जी मार्कशीट बरामद हुईं। पूछताछ में नवनीत ने अपने साथियों शबाब आलम और फरीद अहमद सैफी के नाम बताए, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया।

 

यह भी पढ़ें : यमुना ने हरियाणा में उगली देह, चोटों से भरा है पूरा शरीर, हिमाचल में बड़ी सा.जिश की आशंका!

लैपटॉप, प्रिंटर और फर्जी दस्तावेज बनाने का सामान बरामद

पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, प्रिंटर, तैयार फर्जी मार्कशीट और दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी बरामद किए गए। इन उपकरणों के जरिए कथित तौर पर नकली शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे।

₹5 से ₹10 हजार में तैयार होती थी फर्जी मार्कशीट

जांच में सामने आया कि गिरोह प्रत्येक फर्जी मार्कशीट या प्रमाणपत्र के बदले ₹5,000 से ₹10,000 तक वसूलता था। आरोपियों ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि वे अब तक करीब 100 से 150 फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट बेच चुके हैं। गिरोह मुख्य रूप से ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जिन्हें नौकरी के लिए 10वीं या 12वीं पास होने का प्रमाणपत्र चाहिए होता था।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: 5 दिन से लापता युवती की जंगल में मिली देह, 2 माह बाद थी शादी; उठ रहे कई सवाल

पुराने पंजीकरण का उठाया जा रहा था फायदा

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह एक समाप्त (Expired) हो चुके शैक्षणिक संस्थान के पंजीकरण का कथित रूप से दुरुपयोग कर बैकडेट में फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।

शिक्षा बोर्ड ने खुद को बताया पूरी तरह अलग

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि बोर्ड का इस फर्जीवाड़े से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि बोर्ड का कार्य केवल विद्यार्थियों का पंजीकरण करना, परीक्षाएं आयोजित करना और सफल अभ्यर्थियों को प्रमाणपत्र जारी करना है। बोर्ड किसी निजी संस्था या व्यक्ति द्वारा किए जा रहे ऐसे अवैध कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं है।

 

यह भी पढ़ें : विक्रमादित्य सिंह के विभाग की सुस्ती पर हाईकोर्ट सख्त, पुल निर्माण देरी पर सुक्खू सरकार से मांगा जवाब

प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने की अपील

बोर्ड अध्यक्ष ने सरकारी और निजी संस्थानों से अपील की कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का बोर्ड से अनिवार्य रूप से सत्यापन कराया जाए। उनका कहना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बोर्ड के नाम पर किसी भी तरह की जालसाजी का मामला सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

यह भी पढ़ें : यह भी पढ़ें- विक्रमादित्य ने PM मोदी को दी नसीहत: बोले- शिक्षा मंत्री का लें इस्तीफा, फिर छात्रों से करें बात

जांच जारी, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश

दिल्ली पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी मार्कशीट तैयार करने और बेचने के इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा किन-किन राज्यों में ऐसे दस्तावेज पहुंचाए गए। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख