सोलन। आज के दौर में AI लोगों के लिए कई जरूरी काम आसान बना रहा है। लेकिन कुछ लोग इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर लोगों को ठगने का काम भी कर रहे हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से सामने आया है। यहां पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने AI की मदद से फर्जी दवा कंपनी तैयार की और देशभर के दवा कारोबारियों को अपनी जालसाजी का शिकार बनाया।
फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर खुद को बता रहा था असली दवा निर्माता
आरोप है कि अजय कुमार नाम का आरोपी ‘मैसर्ज डा. ट्रस्टमेड’ के नाम से एक फर्जी दवा कंपनी चला रहा था। बताया जा रहा है कि वह दवा बनाने का नकली लाइसेंस, GMP-GLP सर्टिफिकेट, प्रोडक्ट की मंजूरी और दूसरे सरकारी कागजात तैयार करता था। इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए वह लोगों को यह भरोसा दिलाता था कि उसकी कंपनी कानूनी तौर पर दवाइयां बनाने का काम करती है।
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ड्रग कंट्रोल विभाग को मिली सूचना, जांच के बाद हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की जानकारी राज्य औषधि नियंत्रक डा. मनीष कपूर को मिली थी। इसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर विकास ठाकुर, सुरेश कुमार और अक्षय ठाकुर की एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने बद्दी पुलिस की मदद से जांच शुरू की और इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
आरोपी के पास से मिले फर्जी लाइसेंस और सरकारी दस्तावेज
जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से हिमाचल प्रदेश ड्रग कंट्रोल प्रशासन के नाम पर बनाए गए कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए। इनमें ड्रग मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, GMP-GLP प्रमाणपत्र, उत्पाद अनुमतियां, दवा के लेबल और कई अन्य नियामकीय कागजात शामिल हैं।
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इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी मिले बड़ी संख्या में नकली दस्तावेज
जांच टीम को आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के दौरान भी बड़ी संख्या में फर्जी लाइसेंस, प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज मिले। आरोप है कि इन दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया गया था, जिससे वे देखने में बिल्कुल सरकारी रिकॉर्ड जैसे लगें।
वेबसाइट और ऑनलाइन प्रोफाइल के जरिए लोगों को दिलाया जाता था भरोसा
फर्जी कंपनी को असली दिखाने के लिए वेबसाइट, ऑनलाइन प्रोफाइल और दूसरे डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। इन माध्यमों के जरिए दवा कारोबारियों को कंपनी के बारे में जानकारी दी जाती थी और उनसे दवाओं के ऑर्डर लेकर अग्रिम भुगतान लिया जाता था।
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आरोपी को हरियाणा पुलिस के हवाले किया गया
कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को हरियाणा के साइबर क्राइम थाना कैथल की पुलिस के हवाले कर दिया गया है। वहीं, बरामद किए गए मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच के बाद इस मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।
फर्जी दवा कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी
राज्य औषधि नियंत्रक डा. मनीष कपूर ने कहा कि दवा नियामक व्यवस्था की विश्वसनीयता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों और नकली दवा कंपनियों के जरिए लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति है और ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
