शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून पीक पर है और कुछ ही दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में जमकर तबाही भी हो चुकी है। कई गांव में बाढ़ आने के कारण घर तक बह गए और ग्रामीणों की सारी गाढ़ी कमाई बारिश में धुल गई।
हिमाचल की दर्दनाक तस्वीर!
वहीं, दूसरी ओर बीते 2 साल पहले आई आपदा के जख्म अभी तक हरे हैं और लोगों की आस धीरे-धीरे दम तोड़ने लगी है। रामपुर बुशहर के समेज क्षेत्र में 31 जुलाई 2024 को आई विनाशकारी आपदा के दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन यहां के बच्चों का संघर्ष अब भी खत्म नहीं हुआ है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : 3 साल की नीतिक्षा का कमाल, महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का शुद्ध पाठ कर बनाया रिकॉर्ड
आपदा में तबाह हुआ स्कूल
बादल फटने और बाढ़ में पूरी तरह तबाह हुए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय का अब तक पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। इसके चलते 73 स्कूली छात्र और 13 छोटे बच्चे आज भी न्यूकुंदर महिला मंडल के आंगन में तिरपाल के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
दो साल बाद भी नहीं बना नया स्कूल
स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष संदीप कुमार ने बताया कि समेज खड्ड में आई बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में पूरे स्कूल परिसर को मलबे में बदल दिया था। हालांकि परिसर का अधिकांश हिस्सा अब साफ हो चुका है, लेकिन स्कूल के बाहर आज भी बड़ी-बड़ी चट्टानें और मलबा उस त्रासदी की गवाही दे रहे हैं। बरसात शुरू होते ही बच्चों और शिक्षकों के मन में फिर वही डर लौट आता है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल के यूट्यूबर रोहित कटवाल गिरफ्तार- 3 दिन की रिमांड पर भेजा गया..
बारिश में तिरपाल के नीचे चलती हैं कक्षाएं
मानसून के दौरान एहतियातन पूरे स्कूल को महिला मंडल भवन में शिफ्ट किया जाता है। वहां पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण बच्चों को आंगन में तिरपाल के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। एक-दो कमरों में सभी कक्षाओं का संचालन करना भी शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
CM का वादा भी अधूरा
आपदा के बाद CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समेज का दौरा कर सुरक्षित और आधुनिक स्कूल भवन बनाने का भरोसा दिया था। नए भवन के लिए जमीन भी चिन्हित कर शिक्षा विभाग के नाम कर दी गई है, लेकिन दो साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि भूगर्भीय जांच और प्रशासनिक मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
यह भी पढ़ें- पत्नी के लिए हिमाचल का SP बना शख्स : हरियाणा पुलिस पर झाड़ा रौब, अब पकड़ा गया
ग्रामीणों ने उठाई यह मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि जब तक स्थायी भवन तैयार नहीं होता, तब तक बच्चों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड या पोर्टा-कैबिन कक्षाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशासन ने क्या कहा?
SDM निरमंड जगदीप राठौर ने कहा कि निर्माण कार्य में देरी के कारणों की जानकारी लोक निर्माण विभाग से ली जाएगी और जल्द समाधान का प्रयास किया जाएगा। वहीं विद्यालय की प्रधानाचार्य भारती वर्मा ने बताया कि फिलहाल छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है और भूमि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए भवन का निर्माण शुरू किया जा सकेगा।
