#अव्यवस्था
August 27, 2026
मां चिंतपूर्णी के ‘सुगम दर्शन’ से 16.38 करोड़ की कमाई, विधानसभा में सामने आया आंकड़ा
पर्ची सॉफ्टवेयर में मिली अनियमितता, FIR दर्ज- जांच जारी
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ऊना। हिमाचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी के दरबार में श्रद्धालुओं को जल्दी और सुविधाजनक दर्शन करवाने की व्यवस्था मंदिर प्रशासन के लिए भी अच्छी खासी आय का जरिया बन गई है। सुगम दर्शन पर्ची व्यवस्था शुरू होने के बाद करीब तीन साल में मंदिर को 16.38 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है।
इसका खुलासा हिमाचल विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में हुआ है। मंदिर में यह व्यवस्था 8 अगस्त 2023 से शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को शुल्क के आधार पर सुगम दर्शन की सुविधा उपलब्ध करवाना था।
भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने विधानसभा में सुगम दर्शन पर्ची व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा था। उन्होंने इसके शुरू होने की तारीख, इससे होने वाली सालाना आय और पर्ची सॉफ्टवेयर में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
डिप्टी सीएम एवं भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने लिखित जवाब में बताया कि व्यवस्था शुरू होने के बाद अगस्त से दिसंबर 2023 के बीच मंदिर को 1.43 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।
मां चिंतपूर्णी मंदिर में सुगम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को प्रवेश पास जारी किए जाते हैं। इसके लिए मंदिर परिसर स्थित बाबा माईदास सदन में काउंटर बनाया गया है।
1,100 रुपये के पास पर अधिकतम पांच श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन की अनुमति दी जाती है। वहीं बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा महज 50 रुपये में उपलब्ध करवाई जाती है।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए शुरू की गई थी, जो लंबी कतार से बचकर सुविधा के साथ दर्शन करना चाहते हैं।
विधानसभा में पूछे गए सवाल का एक अहम हिस्सा सुगम दर्शन पर्ची सॉफ्टवेयर को लेकर भी था। सरकार ने जवाब में कहा कि सुगम दर्शन पर्चियां काटने में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। मगर मंदिर अधिकारी द्वारा सॉफ्टवेयर के निरीक्षण के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं। इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाई गई है और पुलिस जांच जारी है।
मां चिंतपूर्णी मंदिर हिमाचल के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है और यहां सालभर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। नवरात्र, सावन और अन्य धार्मिक पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में सुगम दर्शन व्यवस्था जहां श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुविधा देती है। वहीं पिछले तीन वर्षों में इससे हुई 16 करोड़ रुपये से अधिक की आय ने इसे मंदिर की कमाई के महत्वपूर्ण स्रोतों में भी शामिल कर दिया है।