शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर गरीब परिवारों के हकों पर कुछ रसूखदारों ने डाका डाल दिया है। जी हां यह मामला हिमाचल की राजधानी शिमला से सामने आया है। यहां केंद्र की आशियाना योजना के तहत गरीबों के लिए बनाए गए आशियानों पर कुछ अमीर लोगों ने कब्जा कर लिया है। शिमला के ढली में गरीबों के लिए 90 से अधिक आवास बनाए गए, लेकिन अब वहां का नजारा देख कर ऐसा लगता है कि यह कोई वीआईपी कॉलोनी है। क्योंकि इन आवासों के बाहर लग्जरी गाड़ियां खड़ी मिलती हैं।
गरीबों के आशियानों पर अमीरों का कब्जा
दरअसल केंद्र सरकार की आशियाना योजना दो के तहत शिमला के ढली में गरीब परिवारों के लिए 90 से अधिक आवास बनाए गए थे। नगर निगम शिमला ने इनमें से कुछ आवास उन गरीब परिवारों को आबंटित किए, जिनके पास ना तो घर था और ना ही जमीन। लेकिन गरीब परिवारों के लिए बने इन आवासों पर कुछ रसूखदारों ने भी फर्जी दस्तावेज के सहारे कब्जा जमा लिया है। जिसकी नगर निगम को शिकायतें भी मिली थीं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : रेलवे फाटक के पास मिली होटल कर्मी की देह, मुंह से निकल रहा था खू...
ऐसे हुआ खुलासा
नगर निगम को मिली शिकायतों की जांच में यह खुलासा हुआ है कि कुछ लाभार्थियों ने झूठे हलफनामे और गलत जानकारी देकर मुफ्त आवास हासिल कर लिए। वहीं, असली पात्र गरीब परिवार अब भी किराए के कमरों में या अस्थायी झुग्गियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
पति सरकारी नौकरी में, पत्नी ने ले लिया आवास
शिमला के ढली आवासीय परियोजना में एक मामला सामने आया है जिसमें महिला को वर्ष 2020 में आवास आवंटित किया गया, जबकि जांच में पता चला कि उसका पति कई वर्षों से सरकारी सेवा में कार्यरत है। यह मामला अब सार्वजनिक होते ही निगम प्रशासन उस आवंटन को रद्द करने की प्रक्रिया में जुट गया है। इसी तरह के कई अन्य मामले भी अब जांच के दायरे में हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में फिर फटा बादल : भारी बारिश में कई परिवार हुए बेघर, आंखों के सामने बहे आशियाने
गरीबों की बस्ती या अमीरों की पार्किंग
जो आवास कंेद्र की मदद से गरीबों के लिए बनाए गए थे वहां आज दर्जनों महंगी और लग्जरी गाड़ियां खड़ी नजर आती हैं। कॉलोनी में रहने वाले कई परिवारों के पास कारें, दोपहिया और होमस्टे चलाने की सुविधाएं हैं। स्थानीय लोग हैरान हैं कि अगर ये लोग सच में गरीब हैं, तो फिर ये सब सुविधाएं कहां से आ गईं कई मकान सबलेट भी कर दिए गए हैं, यानी जिनके नाम आवास हैं, वे खुद वहां नहीं रहते।
यह भी पढ़ें : हिमाचल कांग्रेस को मिलेगा नया संगठन- खड़गे ने आज बुलाई मीटिंग, अध्यक्ष की रेस में ये 6 दावेदार
कृष्णानगर में भी अवैध कब्जे
कुछ ऐसा ही हाल शिमला शहर के कृष्णानगर क्षेत्र का भी है। यहां भी गरीबों के लिए बनाए गए राजीव आवास योजना के मकानों पर अब ऐसे लोग रह रहे हैं जिनके पास न तो पात्रता है, न ही अधिकार। 2023 में आई आपदा के बाद इन मकानों में कुछ प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से रखा गया था, लेकिन दो साल बाद भी वे अब तक वहां टिके हुए हैं। असली जरूरतमंद परिवार, जिन्हें ये आवास मिलने चाहिए थे, आज भी दर दर भटक रहे हैं। निगम प्रशासन ने अब इन अस्थायी निवासियों को मकान खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : सड़क पर दरकी पहाड़ी, जाम में घंटों फंसी रही एंबुलेंस- पूर्व MLA के भाई ने तोड़ा दम
अब होगी हर मकान की जांच
नगर निगम ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आवंटित मकानों की जांच का फैसला लिया है। जांच का जिम्मा प्रोजेक्ट निदेशक धीरज चंदेल को सौंपा गया है। एक मामले की पुष्टि हो चुकी है और अब अन्य मामलों की छानबीन शुरू हो चुकी है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ सच में जरूरतमंदों को मिल रहा है, या फिर यह सिस्टम चंद रसूखदारों के लिए ही बना है।
