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June 6, 2026
सीएम सुक्खू के CBSE स्कूलों में 'टीचर संकट', पढ़ाई ठप होने से 200 बच्चों ने स्कूल को कहा अलविदा
सीबीएसई स्कूलों से बच्चों का मोहभंग
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के 148 स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न से जोड़ा था। शुरुआत में इस पहल को अभिभावकों और विद्यार्थियों का अच्छा समर्थन मिला और बड़ी संख्या में बच्चों का प्रवेश इन स्कूलों में हुआ। लेकिन अब शिक्षकों की कमी के चलते कई सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने लगी है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद भी कई स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। यही कारण है कि कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम इन स्कूलों से कटवाकर अन्य विद्यालयों में दाखिला करवाना शुरू कर दिया है।
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मगर प्रदेश के विभिन्न सीबीएसई स्कूलों से अब तक करीब 200 छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं। सबसे अधिक छात्र सरकाघाट, बद्दी, चंबा, सुंदरनगर, नेरवा और करसोग जैसे क्षेत्रों के स्कूलों से बाहर हुए हैं। शिक्षा विभाग यदि जल्द नियुक्तियां नहीं करता है तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू कर बेहतर शिक्षा का वादा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बताया जा रहा है कि सीबीएसई स्कूलों के लिए शिक्षकों की तैनाती को लेकर विभाग ने प्रक्रिया शुरू की थी और हजारों शिक्षकों का चयन भी किया जा चुका है।
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हालांकि पंचायत चुनावों के दौरान लागू आचार संहिता के कारण काउंसलिंग और तैनाती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। चुनाव समाप्त होने और आचार संहिता हटने के बावजूद अभी तक नियुक्तियों को लेकर कोई स्पष्ट कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।
वहीं, चयनित शिक्षकों में से कुछ ने नियुक्ति में हो रही देरी के कारण अन्य स्कूलों में अपनी सेवाएं देने का विकल्प चुन लिया है। इससे सीबीएसई स्कूलों में रिक्त पदों की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
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कई क्षेत्रों में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समितियों ने सरकार से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए तो विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान होगा और सीबीएसई स्कूलों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होंगे।
स्कूल प्रबंधन समितियों का मानना है कि जिन स्कूलों को आधुनिक शिक्षा मॉडल के रूप में विकसित किया जाना था, वे वर्तमान में केवल नाममात्र के सीबीएसई स्कूल बनकर रह गए हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को अपेक्षित स्तर की शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
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अभिभावकों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि चयनित शिक्षकों की काउंसलिंग और तैनाती प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए। उनका कहना है कि यदि आगामी दिनों में रिक्त पद भर दिए जाते हैं तो छात्रों के पलायन को रोका जा सकता है और सरकारी सीबीएसई स्कूलों के प्रति लोगों का भरोसा फिर से मजबूत होगा।