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June 10, 2026

हिमाचल : डिपुओं तक पहुंचने से पहले ही गायब हो रहा राशन, बोरियों का वजन कम, भड़के डिपो संचालक

तय मात्रा से 6 से 8 किलोग्राम तक कम राशन

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Civil Supplies

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस के तहत उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाने वाले राशन को लेकर नया विवाद सामने आया है। प्रदेश के डिपो संचालकों ने आरोप लगाया है कि सरकारी गोदामों से भेजी जा रही राशन सामग्री निर्धारित मात्रा से कम वजन की निकल रही है, जिससे न केवल उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है बल्कि डिपो धारकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

तय मात्रा से 6 से 8 किलोग्राम तक कम राशन

प्रदेश डिपो संचालक समिति के अनुसार चावल, आटा और चीनी की बोरियों में कई बार तय मात्रा से 6 से 8 किलोग्राम तक कम राशन पाया जा रहा है। डिपो संचालकों का कहना है कि वे विभाग को पूरी मांग भेजने के साथ-साथ राशन की अग्रिम राशि भी जमा करवाते हैं, लेकिन जब राशन डिपो तक पहुंचता है तो उसका वजन कम निकलता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को पूरा राशन देना मुश्किल हो जाता है।

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समिति के अध्यक्ष अशोक कवि ने कहा कि सरकार की ओर से राशन तौलकर देने और वेट चेक मेमो जारी करने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा। उनका आरोप है कि कई गोदामों में आज भी पुरानी वजन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि डिपो धारकों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से राशन तौलने के लिए बाध्य किया गया है।

कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखी शिकायतें

उन्होंने यह भी दावा किया कि केवल अनाज ही नहीं बल्कि खाद्य तेल की सप्लाई में भी गड़बड़ी सामने आती है। कई बार 12 लीटर क्षमता वाली पेटियों में निर्धारित मात्रा से कम तेल पाया जाता है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं की शिकायतों का सामना डिपो संचालकों को करना पड़ता है, जबकि कमी की जिम्मेदारी उनके स्तर पर नहीं होती।

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डिपो संचालकों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें रखी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि निरीक्षण के दौरान डिपो संचालकों से बेहद सख्ती से हिसाब-किताब मांगा जाता है, जबकि गोदामों में राशन की गुणवत्ता और वजन की नियमित जांच पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन की क्षेत्रीय प्रबंधक का बयान

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कई डिपो संचालक काम छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। इससे प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रभावित हो सकती है और हजारों राशन कार्ड धारकों को समय पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

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उधर, हिमाचल प्रदेश सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन की क्षेत्रीय प्रबंधक रीता कुमारी ने कहा कि उनके पास अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची है। हालांकि मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है और विभाग इसकी गंभीरता से जांच करेगा। उन्होंने बताया कि संबंधित गोदामों और आटा मिलों में राशन के वजन की जांच करवाई जाएगी तथा रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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