#अव्यवस्था
June 10, 2026
हिमाचल के CBSE स्कूलों में HP बोर्ड की पढ़ाई : टीचरों की भी भारी कमी, कई बच्चों ने कटवाए नाम
स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पाई है, पढ़ाई पर पड़ रहा असर
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मंडी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मॉडल बनाने के इरादे से उन्हें CBSE बोर्ड में बदलने का बड़ा प्रयोग शुरू किया था। दावा था कि इससे सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को टक्कर देंगे और बच्चों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
मगर अब यही प्रयोग सवालों के घेरे में आ गया है। क्योंकि जिन स्कूलों को CBSE का दर्जा दिया गया, वहां न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही पढ़ाई CBSE पैटर्न के अनुसार हो पा रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर शिक्षा विभाग में चल क्या रहा है?
सराज क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जंजैहली में अब इस स्थिति का असर दिखाई देने लगा है। CBSE बोर्ड में शामिल किए जाने के बाद यह प्रदेश का दूसरा ऐसा स्कूल था, जहां सबसे अधिक 596 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। मगर अब अभिभावकों का मोहभंग होने लगा है और बच्चों के नाम कटवाने का सिलसिला शुरू हो गया है।
जानकारी के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं से पांच और छठी से बारहवीं तक के 14 विद्यार्थियों समेत कुल 19 बच्चों ने स्कूल छोड़कर अन्य संस्थानों में दाखिला ले लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जून महीना शुरू हो गया है, लेकिन स्कूल में अब तक शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पाई है। इससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
अभिभावक सीमा ठाकुर का कहना है कि स्कूल को CBSE तो बना दिया गया, लेकिन पढ़ाई अभी भी हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के ढर्रे पर ही चल रही है। ऐसे में अभिभावक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी कारण उन्होंने अपने बच्चे का नाम जंजैहली स्कूल से कटवाकर दूसरे स्कूल में दाखिला करवा दिया।
स्कूल प्रबंधन समिति (SMCके अध्यक्ष देवी सिंह ठाकुर ने बताया कि अप्रैल में नया सत्र शुरू होने के बावजूद अभी तक कई पद खाली पड़े हैं। स्कूल में कॉमर्स के एक शिक्षक, TGT आर्ट्स, LT और नॉन-टीचिंग स्टाफ में वरिष्ठ सहायक व लिपिक के पद रिक्त हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द नियुक्तियां नहीं हुईं तो स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ सकती है।
स्कूल के प्रधानाचार्य राजेश सैनी ने बताया कि CBSE में शामिल होने के बाद पिछले वर्ष की तुलना में यहां 596 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। हालांकि कुछ व्यक्तिगत कारणों से 19 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा है।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने जिन स्कूलों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बनाने का सपना दिखाया था, आज वहां शिक्षक ही नदारद हैं और पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति बताया।