शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को व्यवहारिक, जरूरत आधारित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिक्षा विभाग के उस महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत प्रदेश के छात्र संख्या में बेहद कम या शून्य वाले 618 स्कूलों को बंद, मर्ज या डाउनग्रेड किया जाएगा।
103 स्कूल होंगे पूरी तरह बंद
यह फैसला लंबे समय से चली आ रही मांग और खर्च बनाम परिणाम के असंतुलन को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के अनुसार, जिन स्कूलों में एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है, ऐसे 103 स्कूलों को डिनोटिफाई कर पूरी तरह से बंद किया जा रहा है।
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443 स्कूलों को किया जाएगा मर्ज
इसके अलावा 10 या उससे कम छात्रों वाले 443 स्कूलों को पास के स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। मर्जिंग के लिए 4 से 5 किलोमीटर तक के दायरे में स्थित उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां छात्रों की संख्या अधिक है।
कौन-कौन से स्कूल शामिल?
- 72 प्राइमरी स्कूल (शून्य छात्र संख्या वाले)
- 28 मिडल स्कूल
- 3 हाई स्कूल
- 203 प्राइमरी स्कूल, जहां 5 या उससे कम छात्र हैं
- 92 मिडल स्कूल, जहां 10 या उससे कम छात्र हैं
- 7 हाई स्कूल, जिनमें 20 या उससे कम छात्र हैं
- इन स्कूलों को क्रमशः 2 से 4 किलोमीटर की परिधि में स्थित स्कूलों में समायोजित किया जाएगा।
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75 स्कूलों का दर्जा घटाया जाएगा
प्रदेश में ऐसे 75 उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जहां छात्रों की संख्या जरूरत से काफी कम है। इन स्कूलों का दर्जा घटाकर मिडल या प्राइमरी स्तर पर लाया जाएगा, ताकि संसाधनों का समुचित प्रयोग हो सके और शिक्षकों की तैनाती व्यावहारिक हो।
1,120 शिक्षक होंगे सरप्लस
इन 618 स्कूलों के पुनर्गठन के बाद, करीब 1,120 शिक्षक अतिरिक्त (सरप्लस) हो जाएंगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन शिक्षकों को उन स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां शिक्षकों की जरूरत है। इससे शिक्षकों की असमान तैनाती की समस्या काफी हद तक दूर होगी।
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कॉलेजों में भी बड़े बदलाव की तैयारी
100 या उससे कम छात्रों वाले सरकारी कॉलेजों को भी सरकार मर्ज करने की प्रक्रिया में है। जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों के कॉलेजों में यह सीमा 75 छात्र रखी गई है। शिक्षा विभाग ने कॉलेज मर्जिंग के लिए प्रस्ताव आमंत्रित कर दिए हैं।
चयन प्रक्रिया में भी बदलाव
शिक्षा मंत्री ने कहा कि कई उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कारों तक नहीं पहुंच पाते, इसलिए यह नई व्यवस्था अधिक न्यायपूर्ण होगी। सरकार ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समावेशिता बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस बार से-
50% शिक्षकों का चयन आवेदन आधारित होगा
बाकी 50% का चयन शिक्षा विभाग खुद करेगा
अब स्थानीय पंचायतें, SMC और जिला उपनिदेशक भी शिक्षकों के नामांकन कर सकेंगे।
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सभी शिक्षक वापस बुलाए जाएंगे
शिक्षा विभाग ने अन्य राज्यों या अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शिक्षकों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। ऐसे सभी शिक्षकों को नोटिस भेजे जाएंगे और उनके संस्थानों के प्रमुखों को पत्र भेजकर पदमुक्त करने को कहा जाएगा।
110 पद जल्द भरे जाएंगे
राज्य के सरकारी स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन टीचर्स (डीपीई) के 110 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रस्ताव मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में रखा जाएगा।
