शिमला। हिमाचल प्रदेश में बीते तीन महीनों के भीतर रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दामों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी 2026 से मई 2026 के बीच खाद्य तेल, घी, मसाले, आटा, चावल और डेयरी उत्पादों की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है।

हिमाचल में महंगाई की मार

बाजार विशेषज्ञ इस तेजी को पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और बढ़ती परिवहन लागत से जोड़कर देख रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद मालभाड़ा महंगा हुआष

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इसका सीधा असर हिमाचल के बाजारों तक पहुंची खाद्य सामग्री पर पड़ा। सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण खुदरा बाजार में दाम लगातार बढ़ते गए और इसका सबसे ज्यादा असर आम परिवारों की रसोई पर पड़ा है।

तेल के दामों में लगातार बढ़ोतरी

फरवरी में 175 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला सरसों तेल अब 190 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं रिफाइंड तेल 165 रुपये से बढ़कर 170 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बीच उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कई कंपनियों ने एक लीटर के पैकेट का वजन घटाकर 700 से 750 ग्राम तक कर दिया है।

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राशन भी हुआ महंगा

चावल की कीमतों में भी पांच रुपये प्रति किलो तक का उछाल आया है। फरवरी में जो चावल 65 से 70 रुपये किलो बिक रहा था, वह अब 70 से 75 रुपये किलो तक पहुंच चुका है। आटे की कीमतों में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जो आटा 35 से 38 रुपये किलो था, अब वही 38 से 40 रुपये किलो बिक रहा है।

मसालों ने बढ़ाई रसोई की चिंता

महंगाई का असर मसालों और डेयरी उत्पादों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गरम मसाला जहां फरवरी में 105 से 110 रुपये प्रति 100 ग्राम था, अब 115 रुपये तक पहुंच गया है। देगी मिर्च के दामों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला है। इसका रेट 100-105 रुपये से बढ़कर 120-125 रुपये प्रति 100 ग्राम तक पहुंच गया है।

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65 रुपये महंगा हुआ घी

वहीं हिमाचल के घरों में इस्तेमाल होने वाला हिम घी तीन महीनों में करीब 65 रुपये महंगा हो गया है। फरवरी में 660 रुपये प्रति किलो बिकने वाला घी अब 725 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वेरका दूध में भी 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जबकि ब्राउन ब्रेड 55 रुपये से बढ़कर 60 रुपये की हो गई है।

व्यापार मंडल ने जताई चिंता

सोमेश शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकट और बढ़े मालभाड़े के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। यही वजह है कि बाजार में खाद्य सामग्री के दाम तेजी से बढ़े हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्थानीय स्तर पर जमाखोरी रोकने की कोशिश की जा रही है ताकि लोगों को जरूरी सामान उचित कीमतों पर मिल सके।

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आम जनता पर बढ़ा बोझ

पहाड़ों में पहले से ही परिवहन लागत ज्यादा होने के कारण महंगाई का असर मैदानों की तुलना में अधिक दिखाई देता है। अब लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि रसोई का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है और आने वाले समय में यदि तेल की कीमतें और बढ़ीं तो महंगाई और तेज हो सकती है।

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