कांगड़ा। कांगड़ा जिले के फतेहपुर विधानसभा के गोलवां पंचायत के रहने वाले बिजली बोर्ड के लाइनमैन अजय कुमार की करंट लगने से मौत का मातम अभी थमा नहीं है। मंगलवार को अजय कुमार का अंतिम संस्कार हुआ। हिमाचल प्रदेश में बीते 10 साल में बिजली बोर्ड के 150 तकनीकी कर्मचारी करंट लगने से जान गंवा चुके हैं।

2 हफ्ते में 3 की मौत

इसके बावजूद हिमाचल सरकार ने बिजली बोर्ड के मैदानी अमले पर काम के बोझ को कम करने और उन्हें सुरक्षा उपकरण देने की जहमत नहीं उठाई है। अब बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने अजय कुमार की मौत पर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

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यूनियन का कहना है कि बीते 2 हफ्ते में 3 बिजली कर्मियों की करंट लगने से मौत हुई है। अजय कुमार अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और एक बेटा छोड़ गए हैं।

50 लोगों का काम 5 लोगों से

यूनियनों के अनुसार, हादसों के पीछे सबसे बड़ा कारण कर्मचारियों की भारी कमी है। पहले जहां एक सेक्शन में 50 कर्मचारी काम करते थे, अब मात्र 5 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इस वजह से मौजूदा स्टाफ पर असहनीय दबाव है।

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फील्ड स्टाफ को 25 से 30 ट्रांसफार्मरों के अलावा कई किलोमीटर लंबी एचटी और एलटी लाइनों की देखभाल करनी पड़ रही है। ऐसे में लगातार काम के दबाव और सुरक्षा उपकरणों की कमी के चलते हादसे बढ़ रहे हैं।

सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा

यूनियन के नेताओं ने बताया कि बिजली बोर्ड में हजारों फील्ड और तकनीकी कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं, जिसके कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक दबाव है। एक-एक कर्मचारी को 25 से 30 ट्रांसफार्मरों के साथ-साथ कई किलोमीटर लंबी एचटी और एलटी लाइनों की देखभाल करनी पड़ रही है।

यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है। कर्मचारी मानसिक दबाव और अत्यधिक कार्यभार के कारण घातक और अघातक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।

खाली पदों पर जल्द हो भर्तियां

बिजली बोर्ड कर्मचारियों की यूनियन ने प्रदेश सरकार और बोर्ड प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में जल्द से जल्द उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है

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 उनकी मांग है कि प्रदेश सरकार और बिजली बोर्ड प्रबंधन तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और कर्मचारियों के कार्यभार को कम करने के लिए पर्याप्त संख्या में नए कर्मचारियों की नियुक्ति करे। साथ ही, कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बेहतर उपकरण और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो संघ आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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