कुल्लू। कभी समंदर की लहरों पर सफर करने वाले रुधिर सिंह डोड आज तीर्थन नदी की शांत धारा में रेनबो ट्राउट मछली पालन कर एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल के गुशैणी गांव के रहने वाले रुधिर ने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर मत्स्य पालन को अपना व्यवसाय बनाया और अब न केवल खुद अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि अन्य युवाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
नॉर्वे की यात्रा से आया कारोबार का आइडिया
रुधिर सिंह जब मर्चेंट नेवी में नौकरी कर रहे थे, तब एक बार उन्हें नॉर्वे जाने का मौका मिला। वहां उन्होंने एक होटल में पहली बार ट्राउट मछली का स्वाद चखा। उसी समय उनके मन में यह विचार आया कि हिमाचल की तीर्थन नदी में भी रेनबो ट्राउट का पालन किया जा सकता है। इस विचार ने उन्हें इतना प्रेरित किया कि उन्होंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और मत्स्य पालन में भविष्य बनाने का फैसला किया।
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2012 में शुरू किया फिश फार्म, 2019 में बनाई हैचरी
रुधिर सिंह ने साल 2012 में अपने फिश फार्म की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें मत्स्य पालन विभाग की ओर से 20% की सब्सिडी भी मिली, जिससे उन्होंने नदी किनारे फिश टैंक बनाकर ट्राउट पालन शुरू किया। इसके बाद 2019 में उन्होंने मत्स्य पालन विभाग की मदद से अपनी खुद की हैचरी तैयार की, जिससे वे मछली के छोटे बच्चों को भी तैयार करने लगे। इस तरह उन्होंने खुद को एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया।
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आज रुधिर सिंह डोड अपने फिश फार्म से सालाना 20 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं। उनकी मछलियां हिमाचल के साथ-साथ दिल्ली तक सप्लाई की जाती हैं। इस व्यवसाय में उनका परिवार भी पूरा सहयोग कर रहा है।
प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान, फिर भी नहीं हारी हिम्मत
हालांकि, 2023 में जब तीर्थन नदी में बाढ़ आई, तो उन्हें 25 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। बाढ़ के कारण नदी का प्रवाह बदल गया, जिससे उनके फिश टैंक में पल रही मछलियां नष्ट हो गईं। इस भारी नुकसान के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा कड़ी मेहनत से अपने फार्म को फिर से खड़ा किया।
सरकार से फीड पर सब्सिडी की मांग
रुधिर सिंह ने बताया कि फिश फार्मिंग में सबसे बड़ी चुनौती मछलियों की फीड की ऊंची कीमत है। ट्राउट मछलियों को जो फीड दी जाती है, वह एक निजी कंपनी द्वारा तैयार की जाती है, जिसकी कीमत 150 रुपये प्रति किलो है। रुधिर का कहना है कि यदि सरकार फीड पर सब्सिडी प्रदान करे, तो और भी युवा इस व्यवसाय से जुड़ सकते हैं।
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रुधिर न केवल खुद मछली पालन कर रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी इस व्यवसाय से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी हैचरी से छोटे मछली के बच्चे लेकर कई लोग अपने खुद के फिश फार्मिंग बिजनेस की शुरुआत कर रहे हैं।
तीर्थन घाटी में बढ़ रही ट्राउट की मांग
गर्मियों के मौसम में रेनबो ट्राउट की डिमांड बढ़ जाती है। इस समय पूरी तीर्थन घाटी में केवल रुधिर सिंह का ही फिश फार्म है, क्योंकि मत्स्य पालन विभाग का सरकारी फार्म फिलहाल खाली पड़ा हुआ है। ऐसे में उनकी मछलियों की स्थानीय स्तर पर भी अच्छी खपत हो रही है और उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है।
रुधिर सिंह डोड की यह कहानी बताती है कि अगर मेहनत और सही सोच हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी तकदीर खुद संवार सकता है। उनकी सफलता से न केवल हिमाचल के अन्य युवाओं को प्रेरणा मिल रही है, बल्कि यह साबित होता है कि पारंपरिक नौकरियों से हटकर भी सफलता की नई राहें खोजी जा सकती हैं।
