धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की प्रतिभाशाली बेटी आषिता आचार्य ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत निरंतर हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां की रहने वाली आषिता ने देश के सर्वोच्च स्काउटिंग सम्मान राष्ट्रपति गाइड पुरस्कार को हासिल कर प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन किया है। वह हिमाचल से इस वर्ष यह पुरस्कार जीतने वाली इकलौती छात्रा हैं।

दिल्ली में मिला सम्मान

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में आषिता को यह सम्मान प्रदान किया गया। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद प्रदेश लौटने पर उन्हें शिक्षा विभाग की ओर से जिला उपनिदेशक उच्च शिक्षा विकास महाजन ने विशेष रूप से सम्मानित किया। इस अवसर पर उनके माता.पिता भी उपस्थित रहे, जिनकी आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।

 

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2013 से स्काउटिंग, 2024 में राष्ट्रपति पुरस्कार तक का सफर

आषिता ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि स्काउटिंग से उनका जुड़ाव वर्ष 2013 में हुआ था। वर्ष 2016 में उन्होंने स्टेट लेवल पर गवर्नर अवॉर्ड प्राप्त किया, और फिर इसके बाद अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए लगातार कड़ी मेहनत करती रहीं। उनके अनुसार जो सपना देखा था, वह आज पूरा हुआ है। वर्तमान में आषिता एक गैर.सरकारी संस्था में इंटर्नशिप कर रही हैं और भविष्य में पीएचडी कर समाज सेवा में अपना योगदान देने की इच्छा रखती हैं।

 

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देशभर से 2000 में से चुने गए सिर्फ 120 छात्र

उपनिदेशक विकास महाजन ने जानकारी देते हुए बताया कि हर वर्ष देशभर से लगभग 2000 छात्र राष्ट्रपति स्काउट गाइड पुरस्कार के लिए आवेदन करते हैं, जिनमें से सिर्फ 120 विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। चयन चार श्रेणियों स्काउट, गाइड, रेंजर और रोवर में होता है। गाइड श्रेणी में पूरे देश से चुनी गई 30 छात्राओं में से आषिता एक हैं, जो कि हिमाचल प्रदेश का गौरव बनकर उभरी हैं।

 

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बेटियों के लिए प्रेरणा

आषिता की इस उपलब्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्काउटिंग जैसे सह.शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी न केवल व्यक्तित्व विकास में सहायक है, बल्कि यह विद्यार्थियों को नेतृत्व, सेवा, अनुशासन और आत्मविश्वास जैसे महत्वपूर्ण जीवन.मूल्य भी सिखाती है। इस सम्मान से प्रेरित होकर अब हिमाचल प्रदेश की अन्य बेटियों को भी स्काउटिंग और सामाजिक कार्यों में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा।

 

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