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July 25, 2025
हिमाचल: 11 माह की नीतिका को मिला "चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट" का दर्जा, प्रतिमाह मिलेंगे 4 हजार रुपए
नितिका को 27 साल तक प्रतिमाह मिलेंगे 4 हजार रुपए
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मंडी। हिमाचल के मंडी जिला में 30 जून 2025 को आई विनाशकारी आपदा ने न केवल पहाड़ों को छलनी कर दिया, बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी हमेशा के लिए छीन लीं। इस त्रासदी ने सैकड़ों लोगों को प्रभावित किया, लेकिन सबसे मार्मिक दृश्य था उस 11 माह की मासूम बच्ची का, जो अपने माता.पिता की गोद से हमेशा के लिए वंचित हो गई।
यह कहानी है चच्योट तहसील की तलवाड़ा पंचायत की नन्हीं नीतिका की है। भीषण आपदा में जब उसके माता.पिता की मृत्यु हो गई, तब वह अपनी मासूमियत के साथ इस दुनिया में अकेली रह गई। लेकिन अब इस मासूम नितिका का प्रदेश की सुक्खू सरकार सहारा बनी है। प्रदेश सरकार ने 11 माह की नितिका को मुख्यमंत्री सुख.आश्रय योजना के तहत चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया है। जिसके तहत अब नितिका को 27 साल की उम्र तक हर माह चार हजार रुपए मिलेंगे।
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उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने जानकारी दी कि नीतिका को मुख्यमंत्री सुख.आश्रय योजना के अंतर्गत "Children of the State" घोषित किया गया है। इसके तहत उसे हर माह 4000 रुपए की सहायता राशि दी जाएगी, जो कि उसके 27 वर्ष की आयु तक लगातार मिलती रहेगी। जुलाई और अगस्त माह की सहायता राशि कुल 8000 रुपए पहले ही नीतिका के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई है।
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यह सहायता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और संरचनात्मक सुरक्षा का प्रतीक है। इस योजना के अंतर्गत नीतिका को न केवल शैक्षणिक सहयोग मिलेगा, बल्कि उसके पालन.पोषण, स्वास्,ए और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी भी सरकार उठाएगी। भविष्य में उसकी उच्च शिक्षा, होस्टल की सुविधा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी इसी संरचना के तहत सुनिश्चित की जाएंगी।
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मंडी की यह आपदा केवल नीतिका के जीवन में ही नहीं, बल्कि सैंकड़ों परिवारों में गहरे जख्म छोड़ गई। करसोग की ग्राम पंचायत सनारली के ललित कुमार की मृत्यु के बाद उनके तीन बच्चों 14 वर्षीय कृतिका, 10 वर्षीय अंशिका और 8 माह के राघव को इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना में शामिल किया गया है। इन बच्चों को 1000 प्रति माह प्रति बच्चा सहायता राशि दी जा रही है, जो उन्हें 18 वर्ष की उम्र तक मिलती रहेगी। इसी प्रकार सुरमू गांव के जीत राम के बेटे परमजीत (15) और रणजीत (12) को भी योजना में शामिल कर लिया गया है।
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सराज घाटी में भी 8 ऐसे बच्चे सामने आए हैं, जिन्होंने इस त्रासदी में माता-पिता या संरक्षक खो दिए हैं। उपायुक्त ने बताया कि दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होते ही इन्हें भी "इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना" के तहत सहायता राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर हर प्रभावित बच्चे तक संवेदनशीलता के साथ पहुंचने का कार्य शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिन बच्चों ने इस आपदा में अपने माता-पिता को खोया है, वे अब सरकार की जिम्मेदारी हैं। “हम केवल राहत नहीं देंगे, बल्कि उनके जीवन को एक नई दिशा देंगे। राज्य की सरकार उनके लिए मां-बाप की तरह कार्य करेगी,”