शिमला। हिमाचल प्रदेश में लावारिस कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम हिमाचल की राजधानी शिमला से सामने आया है- यहां पर आज सुबह लावारिस कुत्तों ने तीन स्कूलाी बच्चों पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद एक घायल बच्चे का पिता नगर निगम मेयर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गया।
स्कूली बच्चों को कुत्तों ने नोचा
इस हमले में कुत्तों ने दो बच्चों को बुरी तरह लहूलहुान कर दिया है। जबकि, एक अन्य बच्चे को भी गंभीर घाव आए हैं। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
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स्कूल जा रहे थे बच्चे
बताया जा रहा है कि घटना आज सुबह 7-8 बजे के करीब पेश आई है। घटना के वक्त बच्चे स्कूल जा रहे थे। इसी दौरान ढली टनल के पास लावारिस कुत्तों के झुंड ने बच्चों पर हमला कर दिया। कुत्तों ने अचानक बच्चों पर हमला किया- जिसके चलते बच्चों को वहां से भागने का मौका भी नहीं मिला।
3 पहुंचाए IGMC अस्पताल
घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा किसी तरह कुत्तों से बच्चों को छुड़ाया और उपचार के लिए IGMC शिमला पहुंचाया। इस हमले में तीनों बच्चों की टांगों पर गहरे घाव पड़े हैं। वहीं, आवारा कुत्तों के इस हमले के चलते अब स्थानीय लोगों के दिलों में भी डर बैठ गया है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी रोष व्यापत है। लोग प्रशासन से आवारा कुत्तों से निजात दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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धरने पर बैठ गया पिता
घायल बच्चे के पिता कर्मचंद भाटिया का कहना है उसका बच्चा ढली टनल के पास अपनी गेंद उठा रहा था। इसी दौरान सात-आठ कुत्तों ने उस पर हमला कर उसे लहुलुहान कर दिया। कर्मचंद का कहना है कि शहर में कुत्तों और बदरों का आतंक बढ़ गया है, लेकिन कोई भी इस बात की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। कर्मचंद ने निगम से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।
बढ़ रहा अवारा कुत्तों का आतंक
विदित रहे कि, शिमला सहित हिमाचल प्रदेश के कई शहरों में लावारिस कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गलियों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में झुंड बनाकर घूमते ये कुत्ते न केवल राहगीरों को डराते हैं, बल्कि कई बार बच्चों और बुजुर्गों पर हमला भी कर देते हैं।
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रोजाना कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि नगर निगम द्वारा अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि लावारिस कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए नसबंदी और पुनर्वास जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि आमजन सुरक्षित महसूस कर सकें।
