सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब के पास हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज में 1 सितंबर को सैन्य अभ्यास के दौरान हुए हादसे में लापता दो जवानों के पार्थिव शरीर बरामद कर लिए गए हैं। दोनों जवान नाहन में तैनात 1 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के थे। हादसे की खबर से सेना के साथ-साथ नाहन शहर में भी शोक की लहर है।
200 किलोमीटर दूर मिला लांस नायक रोहित पाटिल का शव
महाराष्ट्र के जलगांव जिले के कोकपिमपरी गांव के रहने वाले 27 वर्षीय लांस नायक रोहित नारायण पाटिल का पार्थिव शरीर 3 सितंबर को दोपहर करीब 12:34 बजे बरामद किया गया। उनका शव हादसे वाली जगह से करीब 200 किलोमीटर दूर हरियाणा के जींद जिले में मिला। रोहित पाटिल अपने पीछे पत्नी और करीब एक साल की बेटी छोड़ गए हैं। जवान की मौत की खबर से परिवार में मातम पसरा हुआ है।
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अजय भगत का शव सहारनपुर में नदी से मिला
वहीं, जम्मू-कश्मीर के अखनूर क्षेत्र के रहने वाले 26 वर्षीय पैरा ट्रूपर अजय भगत का पार्थिव शरीर भी सर्च ऑपरेशन के दौरान बरामद कर लिया गया। उनका शव उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक गांव के पास नदी से मिला। अजय भगत चार बहनों के इकलौते भाई थे और उनकी शादी करीब चार साल पहले हुई थी। इकलौते बेटे की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
1 सितंबर को बोट पलटने से हुआ था हादसा
जानकारी के मुताबिक, 1 सितंबर को हथिनीकुंड बैराज में वाटरमैनशिप ट्रेनिंग के दौरान एक बोट अचानक हादसे का शिकार हो गई थी। इस दौरान दोनों जवान नदी के तेज बहाव में बह गए थे। हादसे के बाद से ही सेना के जवानों के साथ एनडीआरएफ और अन्य टीमें लगातार दोनों की तलाश में जुटी थीं।
मुश्किल हालात के बीच चला सर्च ऑपरेशन
नदी का बहाव तेज होने और इलाके की परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद जवानों और बचाव टीमों ने लगातार तलाशी अभियान चलाया। कई दिनों की तलाश के बाद दोनों जवानों के पार्थिव शरीर नदी से काफी दूर अलग-अलग इलाकों में बरामद किए गए।
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सेना और स्थानीय लोगों ने दी श्रद्धांजलि
दोनों जवानों के पार्थिव शरीर मिलने के बाद सेना के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और नाहन के लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। साथ ही शोक में डूबे परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की गईं। दोनों जवानों का असमय निधन उनके परिवारों के साथ-साथ पूरे सेना परिवार के लिए भी बड़ी क्षति है।
क्या है 1 पैरा (स्पेशल फोर्सेज)?
1 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) भारतीय सेना की बेहद खास और साहसी इकाइयों में शामिल है। इस बटालियन का संबंध पैराशूट रेजिमेंट से रहा है और वर्ष 1978 में इसे स्पेशल फोर्सेज की भूमिका में शामिल किया गया था। इसके जवानों को कठिन परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। देश की सुरक्षा से जुड़े मुश्किल अभियानों में यह इकाई अहम भूमिका निभाती है।
