ठाकुरद्वारा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में तीन किसानों की 40 कनाल भूमि पर पक कर तैयार हो चुकी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। बिजली की तारों से निकली चिंगारी ने इन किसानों पर ऐसा कहर ढाया कि उनकी साल भर की कमाई पल भर में राख के ढेर में बदल गई। मामला कांगड़ा जिला की उपतहसील ठाकुरद्वारा के तहत आते मंड घंडरा गांव की है।

शनिवार दोपहर को लगी आग

यह घटना आज शनिवार दोपहर की है। बताया जा रहा है कि खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली की तारों से अचानक चिंगारी निकली और इस चिंगारी से खेत में पक कर तैयार हो चुकी गेहूं ने आग पकड़ ली। घटना की जानकारी मिलते ही प्रभावित किसानों सहित पूरा गांव आग बुझाने के लिए दौड़ पड़ा। किसानों ने कड़ी मशकत के बाद आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन तब तक तीन किसानों की 40 कनाल भूमि पर लगी गेहूं पूरी तरह से जलकर खाक हो गई।

 

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तीन किसानों पर बरपा कहर

इस आगजनी में सुरेश कुमार निवासी घडरां की 16 कनाल, सुरजीत व हरबंश निवासी घंडरा की 12.12 कनाल जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई है। प्रभावित किसानों ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल पक कर पूरी तरह से तैयार हो गई थी। वह एक दो दिन में कटाई का काम शुरू करने वाले थे। लेकिन उससे पहले ही उनकी आग ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।

ग्रामीणों ने कड़ी मशकत से बुझाई आग

स्थानीय लोगों की मानें तो बिजली की तारों में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और देखते ही देखते आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी खड़ी फसल में ट्रैक्टर टिल्लर चला दिए,  खेतों में लगी मोटरों व घरों से बाल्टियों में पानी ढो ढो कर आग पर काबू पाया और आसपास की खड़ी गेहूं को जलने से बचाया। 

 

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विधायक ने प्रशासन को दिए आदेश

वहीं घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम पंचायत घंडरा के प्रधान युगल किशोर मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना प्रशासन को दी। उन्होंने पीड़ित किसानों को प्रशासन की तरफ से हर संभव सहायता दिलवाने का आश्वासन दिया है। वहीं इंदौरा के विधायक मलेंद्र राजन ने प्रशासन को फसल का आकलन करने के आदेश दिए हैं। एसडीएम इंदौरा सुरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि राजस्व अधिकारियों को मौके पर भेजकर किसानों की फसल का आकलन करवाकर उनको मुआवजा दिया जाएगा।

 

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ग्रामीणों में रोष

इस घटना के बाद ग्रामीणों में काफी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि मंड क्षेत्र में हर साल बिजली की तारों से गेहूं की फसल में आग लगने की घटनाएं पेश आती हैं। उनका कहना है कि यहां बिजली की तारें जमीन से मात्र सात से आठ फुट की ऊंचाई पर हैं। किसान वर्षों से बिजली की लाइनों को सुधारने के लिए विभाग से अपील करते आ रहे हैं, लेकिन विभाग पर कोई असर नहीं होता है और हर वर्ष बिजली की तारों से निकलने वाली चिंगारियां कई एकड़ गेहूं की फसल को जला देती हैं।

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