मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक परिवार के मात्र 20 महीने के बेटे की मौत हो गई। कल तक जिस बच्चे की किलकारियों से पूरा घर गूंजता थाए आज उस घर से परिवार की चीखों ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया।  मंडी जिला में मात्र 20 माह के बच्चे की नहीं बल्कि एक महिला की भी मौत ने हर किसी को सकते में डाल दिया है।

 

मिली जानकारी के अनुसार मंडी जिला के गोहर में एक साथ दर्दनाक घटनाएं सामने आई है। यहां एक 20 माह के बच्चे सहित महिला की मौत हो गई है। हैरानी की बात यह है कि दोनों की ही मौत सांप के काटने से हुई है। बता दें कि बरसात का मौसम जहां हरियाली और खुशियां लेकर आता हैए वहीं इस दौरान सांप के काटने की घटनाएं भी चिंता बढ़ा देती हैं। मंडी जिले के गोहर उपमंडल में सामने आईं दो घटनाओं ने दो परिवारों को ऐसा गम दे दिया हैए जिसे वे शायद ही कभी भूल पाएंगे। 

 

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घर में गूंजी खुशियां अचानक मातम में बदलीं

गोहर उपमंडल के छपराहण गांव में लालमन के परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उनके छोटे से बेटे आरुष को सांप ने डस लिया। महज एक साल आठ माह का आरुष शुक्रवार रात सर्पदंश का शिकार हुआ। परिजन आनन-फानन में उसे इलाज के लिए मंडी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद चिकित्सक मासूम को बचा नहीं सके।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

सांप के काटने के बाद परिवार ने बिना देर किए बच्चे को अस्पताल पहुंचाया था। परिजनों को उम्मीद थी कि समय रहते उपचार मिलने से मासूम की जान बच जाएगी, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और कुछ ही समय में घर की खुशियां मातम में बदल गईं।

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महिला ने रास्ते में तोड़ा दम

गोहर क्षेत्र में ही सर्पदंश की दूसरी घटना ने भी एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। बखाहरी महाल बाड़ा-14 निवासी चिंता देवी, पत्नी भोप सिंह, को 20 अगस्त को सांप ने काट लिया था। सर्पदंश के बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज नेरचौक लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज किया गया।

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नेरचौक मेडिकल कॉलेज में उपचार के बावजूद चिंता देवी की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 22 अगस्त को परिजनों ने उन्हें बेहतर उपचार की उम्मीद में एम्स बिलासपुर ले जाने का फैसला किया। परिवार उन्हें लेकर बिलासपुर की ओर रवाना हुआ, लेकिन दुर्भाग्य से अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई।

दो घटनाओं ने परिवारों को दिया कभी न भूलने वाला दर्द

एक ओर मासूम आरुष की मौत ने उसके माता-पिता और परिवार को तोड़कर रख दिया, तो दूसरी ओर चिंता देवी की मौत से उनके परिवार में भी शोक की लहर दौड़ गई। दोनों घटनाएं यह बताती हैं कि बरसात के मौसम में सांपों के सक्रिय होने के कारण ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता कितनी जरूरी है।

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प्रशासन ने दी आरुष के परिवार को फौरी राहत

तहसील कानूनगो चच्योट डोलम सिंह नेगी के अनुसार, सर्पदंश की दोनों घटनाओं की पुष्टि हुई है। प्रशासन की ओर से मृतक मासूम आरुष के परिजनों को 25 हजार रुपये की फौरी राहत प्रदान कर दी गई है। वहीं चिंता देवी के मामले में आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

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पोस्टमार्टम की औपचारिकता पूरी न होने से मामला अटका

प्रशासन के अनुसार, चिंता देवी के परिवार को सर्पदंश से मौत के मामलों में मिलने वाली राहत और आवश्यक सरकारी औपचारिकताओं की पूरी जानकारी नहीं थी। इसी कारण उनके शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए उसे दोबारा मेडिकल कॉलेज नेरचौक नहीं ले जाया जा सका। अब आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद प्रशासन मामले में आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।

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