भरमौर चंबा। देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र धार्मिक यात्राओं के जरिए अपनी आस्था प्रकट करते हैं। लेकिन इस बार का वर्ष शिव भक्तों के लिए बेहद निराशाजनक रहा है। हिमाचल की दो सबसे प्रसिद्ध और दुर्गम धार्मिक यात्राएं किन्नर कैलाश यात्रा और श्रीखंड महादेव यात्रा पहले ही खराब मौसम व अन्य कारणों से स्थगित की जा चुकी हैं। इन दोनों बड़ी यात्राओं के रद्द होने के बाद अब शिव भक्तों की आखिरी उम्मीद मणिमहेश यात्रा पर टिकी है।
मगर अब इस अंतिम उम्मीद पर भी संकट के घने बादल मंडराने लगे हैं। एक तरफ जहां प्रशासनिक नियमों और उपेक्षा को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ खराब मौसम और चंबा से भरमौर के बीच बार-बार हो रहे लैंडस्लाइड (भूस्खलन) ने इस यात्रा के सफल आयोजन पर एक बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है।
चार सितंबर से प्रस्तावित है यात्रा
श्री मणिमहेश यात्रा आगामी 4 सितंबर से शुरू होनी है। प्रशासन यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए तैयारियों में जुटा हुआ है। यात्रा मार्गों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। मगर इसी बीच यात्रा के मुख्य प्रवेश द्वार हड़सर से ऐसी खबर सामने आई है, जिसने प्रशासन और लंगर समितियों की चिंता बढ़ा दी है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: तेज रफ्तार ट्रक चालक ने कु.चल दिया 26 वर्षीय बाइक सवार युवक, मौके पर निकले प्राण
हड़सर के लोगों ने लिया बड़ा फैसला
ग्राम पंचायत हड़सर में पुजारी वर्ग, युवक मंडल और स्थानीय ग्रामीणों की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस बार यात्रा के दौरान किसी भी लंगर सेवा समिति को निजी भूमि या भवन किराये पर उपलब्ध नहीं करवाए जाएंगे। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि लंगर समितियों को अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।
ईको डेवलपमेंट कमेटी के खिलाफ फूटा आक्रोश
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ईको डेवलपमेंट कमेटी (ईडीसी) ने यात्रा के दौरान छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों पर तो कई तरह के नियम लागू कर दिए हैं, लेकिन बड़े लंगरों के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यात्रा मार्ग पर सबसे अधिक गंदगी और अव्यवस्था बड़े लंगरों के कारण फैलती है, फिर भी उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। पूर्व प्रधान महिंदर शर्मा सहित कई ग्रामीणों ने बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए ईडीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
यह भी पढ़ें : सड़क धंसते ही हवा में लटकी HRTC बस.. अंदर सवार थे 30 लोग, मची चीख-पुकार
कमल कुंड को लेकर भी दी चेतावनी
बैठक में कमल कुंड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे रोमांच या नए रास्तों की तलाश में प्रतिबंधित क्षेत्रों की ओर जाने का प्रयास न करें। ग्रामीणों के अनुसार कमल कुंड क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण है तथा वहां जाना सीधे तौर पर अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है।
धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है कमल कुंड
मणिमहेश कैलाश पर्वत के अग्रभाग में स्थित प्राकृतिक कमल कुंड स्थानीय धार्मिक परंपराओं में अत्यंत पवित्र माना जाता है। गद्दी समुदाय की मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र "अंदरोल" अर्थात मानव प्रवेश वर्जित क्षेत्र की श्रेणी में आता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां प्रकृति और देव परंपराओं के नियमों की अनदेखी करने वालों के साथ कई बार दुखद घटनाएं घट चुकी हैं।
यह भी पढ़ें : घर से निकला मासूम दिव्यांश, 3 दिन से नहीं लौटा वापस; बेबस माता-पिता ने मांगी मदद
किसी भी हादसे में राहत कार्य बन जाता है चुनौती
कमल कुंड और उससे जुड़े ऊंचाई वाले क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद कठिन हैं। सड़क से लंबी दूरी और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण किसी भी दुर्घटना की स्थिति में राहत एवं बचाव अभियान चलाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे क्षेत्रों से घायल या मृत व्यक्तियों को बाहर निकालने में भारी संसाधन और समय लगता है।
खराब मौसम और भूस्खलन बढ़ा रहे चिंता
यात्रा शुरू होने में अभी समय है, लेकिन चंबा से भरमौर मार्ग पर लगातार हो रहे भूस्खलन प्रशासन और श्रद्धालुओं दोनों की चिंता बढ़ा रहे हैं। मानसून के दौरान कई स्थानों पर पहाड़ दरक रहे हैं और सड़कें बार-बार बाधित हो रही हैं। यदि मौसम का यही रुख जारी रहा तो यात्रा संचालन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा मार्ग की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को देखते हुए लगातार निगरानी और समय पर सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी होंगे।
यह भी पढ़ें- हिमाचल : सुबह हुई शादी, शाम को टूटा रिश्ता- विदाई के वक्त ससुराल जाने से मुकर गई दुल्हन
पिछले साल आई थी भयंकर आपदा
मणिमहेश यात्रा को लेकर चिंताएं इसलिए भी बढ़ रही हैं क्योंकि पिछले वर्ष यात्रा के दौरान आई भीषण आपदा ने हजारों श्रद्धालुओं को मुश्किल में डाल दिया था। खराब मौसम और प्राकृतिक आपदा के कारण कई श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। वहीं हजारों लोगों को हड़सर से चंबा तक लंबा पैदल सफर तय करना पड़ा था।
प्रशासन को बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाना पड़ा था। ऐसे में इस वर्ष भी मौसम, भूस्खलन और स्थानीय स्तर पर उभर रहे विवादों को देखते हुए मणिमहेश यात्रा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। श्रद्धालु जहां यात्रा के सफल आयोजन की कामना कर रहे हैं, वहीं प्रशासन और स्थानीय लोग सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
