कुल्लू। देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल में आज शायद ऐसा पहली बार हुआ है, जब लोग अपनी आस्था के लिए हजारों की संख्या में सड़कांे पर उतर आए हों। आज कुल्लू जिला में बिजली महादेव रोपवे को लेकर कुल्लू की सड़कों पर जन सैलाब आ गया। हर किसी की एक ही मांग थी, रोपवे नहीं चाहिए। इस प्रदर्शन में ना तो किसी को बुलाया गया था और ना ही कोई संगठन पार्टी या संस्था के बैनर तले यह प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, बावजूद इसके कुल्लू की सड़कों पर एक जनसैलाब उमड़ा।

 

देवभूमि कुल्लू की धरती पर आज आस्था और आधुनिकता के टकराव ने जनचेतना का रूप ले लिया। बिजली महादेव रोपवे प्रोजेक्ट के विरोध में हजारों की संख्या में लोगों ने ढालपुर मैदान में जुटकर साफ कर दिया कि देवस्थलों पर अब राजनीति या परियोजनाएं नहीं, केवल श्रद्धा की सुनी जाएगी।

हर किसी की जुबान पर था एक ही नारा

इस जनआंदोलन में न कोई पार्टी थी, न कोई झंडा। सिर्फ एक सुर में आवाज़ थी कि रोपवे नहीं चाहिए। रघुनाथ जी के छड़ीबरदार, देव समाज के कारदार, सामाजिक संगठन, वरिष्ठ नेता महेश्वर सिंह और आम जनता दृ सभी एक साथ मंच पर थे। आंदोलन के दौरान जब मंदिरों के दरवाजे आम श्रद्धालुओं के लिए बंद हुए और देव समाज के प्रतिनिधियों की आंखों से आंसू बह निकले, तो यह संकेत था कि मामला केवल विकास बनाम विरोध का नहीं, बल्कि आस्था और आत्मसम्मान का है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: पति के बाद जवान बेटे ने छोड़ी दुनिया, मां की थी आखिरी उम्मीद; टूटा दुखों का पहाड़

जन सैलाब बता रहा नहीं चाहिए रोपवे

बिजली महादेव संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ने कहा कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती। आज रोपवे के खिलाफ सड़कांे पर उतरा यह जन सैलाब खुद बता रहा है कि कुल्लू के लोग बिजली महादेव के साथ हैं, उन्हें रोपवे की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस बयान को हास्यस्पद बताया जिसमें सुक्खू ने कहा था कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि सीएम सुक्खू के चहेते कुल्लू के विधायक इतने दिनों से इस प्रदर्शन को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, यह शर्मनाक है।

 

यह भी पढ़ें:  जयराम के क्षेत्र में सुक्खू के मंत्री का काले झंडों से हुआ स्वागत, गो बैक के लगे नारे; जानें वजह

स्वेच्छा से सड़कों पर उतरे लोग

सरकार भले ही इस प्रोजेक्ट को पर्यटन विकास बता रही हो, लेकिन स्थानीय लोग इसे देवभूमि की भावना पर आघात मान रहे हैं। विरोध की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि व्यापार मंडल के निर्देशों के बावजूद व्यापारियों ने अपनी दुकानें स्वेच्छा से बंद रखीं और हर कोई घर से निकल कर सड़क तक आ पहुंचा। जिसमें महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग बच्चे सब शामिल हुए।

सीएम के बयान ने भड़काया जनआक्रोश

मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रोजेक्ट की जानकारी न होने का दावा और स्थानीय विधायक की चुप्पी ने जनता के आक्रोश को और हवा दी। देव समाज ने दो टूक कह दिया है कि  अगर सरकार ज़िद पर अड़ी रही, तो यह आंदोलन सिर्फ एक रोपवे के खिलाफ नहीं रहेगा, बल्कि यह एक विश्वासघात के खिलाफ जनसंकल्प बन जाएगा।

 

यह भी पढ़ें : हिमकेयर योजना का लाभ ले रहे सरकारी कर्मियों पेंशनरों पर गिरेगी गाज, सुक्खू सरकार ने दिए निर्देश

 

लोगों का कहना है कि यह विरोध पर्यावरणीय चिंताओं, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए है। देववाणी के अनुसार भी बिजली महादेव स्वयं इस परियोजना को अस्वीकार कर चुके हैं। आंदोलनकारियों का संदेश स्पष्ट है कि आस्था पर सुविधा को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। जब जनता खुद कह रही हो कि अब फैसला चाहिए, तो सरकार के पास अब सिर्फ दो विकल्प हैं या तो रोपवे रद्द करे या फिर जनता के निर्णय का सामना करे।