शिमला। हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर उठ रही अफवाहों पर अब विराम लग गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ओपीएस में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। हाल ही में कुछ समाचार माध्यमों में ओपीएस को लेकर संभावित परिवर्तन की खबरें सामने आई थीं, जिसने राज्य के सरकारी कर्मचारियों में असमंजस और चिंता का माहौल बना दिया था।

कई मंत्रियों से की सीधी बातचीत

इस स्थिति को लेकर हिमाचल प्रदेश नई पेंशन योजना कर्मचारी संघ ने गंभीर रुख अपनाते हुए उच्च स्तर पर अपनी बात रखने का निर्णय लिया। संघ के जिला सिरमौर अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, संगठन के राज्य अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शिमला जाकर मंत्रिमंडल के कई प्रमुख सदस्यों से सीधी बातचीत की।

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प्रतिनिधिमंडल में राज्य महासचिव भारत शर्मा, शिमला जिला अध्यक्ष कुशाल शर्मा, बिलासपुर अध्यक्ष राजेंद्र वर्धन, विजय ठाकुर समेत अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

मंत्रियों ने प्रतिनिधिमंडल को किया आश्वस्त

इस दल ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और आयुष मंत्री यादविंदर गोमा से मुलाकात की और ओपीएस को लेकर चल रही आशंकाओं पर विस्तार से चर्चा की।

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सभी मंत्रियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में पुरानी पेंशन योजना को लेकर किए गए वादे पर पूरी तरह कायम है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आर्थिक चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन ओपीएस के क्रियान्वयन में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

सरकार ने कर्मचारियों से की अपील

वहीं, कर्मचारियों की ओर से वेतनमान की बकाया राशि और लंबित महंगाई भत्ते जैसे अन्य मुद्दों को भी बैठक में उठाया गया। इस पर मंत्रियों ने बताया कि वित्त आयोग से अपेक्षित सहायता मिलने पर सभी लंबित मांगों और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और प्रदेश के विकास में सहयोग बनाए रखें। मंत्रियों ने कहा कि कर्मचारी सरकार की रीढ़ होते हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।

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