शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पेयजल व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। शहर के करीब 36 हजार उपभोक्ताओं के घरों में पुराने पानी के मीटर हटाकर अब नए AMR (ऑटोमेटिक मीटर रीडिंग) मीटर लगाए जाएंगे।
शहर में लगेंगे पानी के नए मीटर
खास बात यह है कि ये स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पूरी तरह निःशुल्क दिए जाएंगे। इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। पहले शहर में महंगे अल्ट्रासोनिक मीटर लगाने की योजना थी। मगर बाद में मैकेनिकल AMR मीटर को ज्यादा व्यावहारिक मानते हुए अपनाया गया।
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शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक वीरेन्द्र सिंह ठाकुर के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य पानी की बर्बादी पर रोक लगाना और बिलिंग सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।
बदलाव के पीछे दो बड़े कारण
इस बदलाव के पीछे दो बड़े कारण बताए गए हैं। पहला, इन मीटरों का रखरखाव सस्ता है- जिससे भविष्य में उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। दूसरा ये मीटर शिमला की भौगोलिक परिस्थितियों में भी सटीक रीडिंग देने में सक्षम हैं।
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लोगों को क्या होगा फायदा?
नए मीटर सीधे केंद्रीय सॉफ्टवेयर से जुड़े होंगे, जिससे उपभोक्ताओं को कई सुविधाएं मिलेंगी। अब मीटर रीडिंग के लिए कर्मचारियों के चक्कर खत्म होंगे और हर महीने का डेटा अपने आप अपडेट होगा। उपभोक्ता मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए रोजाना पानी की खपत देख सकेंगे, जिससे अनावश्यक उपयोग पर भी नियंत्रण संभव होगा।
पुराने मीटर हटा, नए लगाए जाएंगे
यह अभियान चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआत मशोबरा और ढली वार्डों से होगी, जिसके बाद पूरे शहर में इसे विस्तार दिया जाएगा। पुराने नीले मीटर, जो 2017 में लगाए गए थे, उन्हें हटाकर नए मीटर लगाए जाएंगे।
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लीकेज की समस्या से छुटकारा
‘24 घंटे पेयजल योजना’ के तहत इस प्रोजेक्ट का काम SUEZ इंडिया को सौंपा गया है। शहर के कई इलाकों टुटू, मज्याठ, समरहिल और कच्चीघाटी में पाइपलाइन बिछाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है। नई पाइपलाइन से पानी का दबाव बेहतर होगा और लीकेज की समस्या में भी कमी आएगी।
सबको एक साथ नहीं मिलेंगे मीटर
पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन के अनुसार, काम मई 2026 से शुरू होकर एक साल में सभी कनेक्शनों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। यह काम वार्ड-वार किया जाएगा, इसलिए सभी उपभोक्ताओं को मीटर एक साथ नहीं मिलेंगे।
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पहले से कम आएगा बिल
निगम के अधिकारियों का कहना है कि इन मीटरों के जरिए बिलिंग पूरी तरह वास्तविक खपत पर आधारित होगी। अगर घर में पानी का उपयोग नियंत्रित है और लीकेज नहीं है, तो बिल पहले से कम या स्थिर भी रह सकता है।
कीमती होती है पानी की हर बूंद
निगम के AGM बसंत राठौर के अनुसार, पहाड़ी शहर शिमला में पानी की हर बूंद कीमती है। पुराने मीटर अक्सर सही रीडिंग नहीं दे पाते थे, जबकि नए एएमआर मीटर कम दबाव में भी सटीक डेटा देंगे। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को फायदा होगा, बल्कि शहर में जल प्रबंधन को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
