शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी बस सेवा अब यात्रियों के साथ-साथ पार्सल भी ढोएगी। दरअसल, हिमाचल प्रदेश में HRTC कुरियर सेवा शुरू होने जा रही है। इस कुरियर सेवा का जनता को बहुत लाभ होगा।
HRTC की नई पहल
आपको बता दें कि HRTC ने दुर्गम और दूरदराज क्षेत्रों तक समयबद्ध कुरियर सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से बस आधारित कुरियर सेवा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इसकी शुरुआत शिमला से संचालित चार अहम रूटों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है।
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बसों में शुरू होगी कुरियर सेवा
निगम ने इस सेवा के संचालन के लिए निजी कुरियर कंपनी DTDC के साथ करार किया है। समझौते के तहत कंपनी अपने पार्सल निर्धारित बसों तक पहुंचाएगी और HRTC की बसें उन्हें संबंधित अंतिम स्टेशन तक सुरक्षित पहुंचाएंगी। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में अन्य लॉजिस्टिक कंपनियों के साथ भी इसी तरह के समझौते किए जा सकते हैं- ताकि राज्य के अधिकतम हिस्सों को सेवा के दायरे में लाया जा सके।
किन रूटों पर मिलेगी सुविधा?
पहले चरण में जिन रूटों पर यह सेवा उपलब्ध होगी, वे हैं-
- शिमला-रामपुर
- रामपुर-रिकांगपिओ
- शिमला-करसोग
- शिमला-चिड़गांव
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सामान भेजने में होगी आसानी
ये सभी मार्ग पहाड़ी और कई स्थानों पर दुर्गम माने जाते हैं। खासकर किन्नौर, रोहड़ू और करसोग क्षेत्र में निजी कुरियर सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पातीं। ऐसे में स्थानीय व्यापारियों, छात्रों और आम नागरिकों को जरूरी दस्तावेज, दवाइयां या छोटे सामान भेजने में आसानी होगी।
कैसे पहुंचेगा पार्सल?
प्रक्रिया के अनुसार, शिमला से कंपनी का अधिकृत कर्मचारी तय समय पर संबंधित HRTC बस को पार्सल सौंपेगा। बस ड्राइवर और कंडक्टर की जिम्मेदारी होगी कि पार्सल सुरक्षित रूप से अंतिम स्टेशन तक पहुंचाया जाए। वहां कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि पार्सल प्राप्त करेगा। निगम का दावा है कि सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा और पार्सल हैंडलिंग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।
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कितना लगेगा किराया?
HRTC के प्रबंध निदेशक निपुण जिंदल के अनुसार, सेवा की शुरुआत पायलट आधार पर की जा रही है। शुरुआती चरण में 40 किलोग्राम तक के पार्सल पर तीन रुपये प्रति किलोमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है।
लोगों के लिए सस्ती सेवा
उदाहरण के तौर पर अगर कोई 20 किलो का पार्सल 100 किलोमीटर भेजता है, तो उसका किराया वजन और दूरी के आधार पर तय होगा। यह दर निजी कुरियर कंपनियों की तुलना में कई मामलों में किफायती मानी जा रही है।
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लगेज पॉलिसी से आगे बढ़ा कदम
MD निपुण जिंदल ने बताया कि इससे पहले HRTC ने बसों में लगेज पॉलिसी लागू की थी, जिसके तहत यात्रियों को अतिरिक्त सामान ले जाने की सुविधा दी गई। अब उसी ढांचे का विस्तार करते हुए कुरियर सेवा जोड़ी जा रही है।
उनका कहना है कि इस पहल से दोहरा लाभ होग। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुलभ और भरोसेमंद कुरियर सेवा मिलेगी। निगम की आय के नए स्रोत विकसित होंगे, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सेब उत्पादकों, छोटे व्यापारियों और ऑनलाइन कारोबार से जुड़े युवाओं के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। समय पर पार्सल डिलीवरी से ग्रामीण क्षेत्रों में e-कॉमर्स गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले महीनों में इसे राज्य के अन्य जिलों और लंबी दूरी के रूटों पर भी लागू किया जा सकता है।
