शिमला। करीब ढाई दशक बाद सरकारी और प्राइवेट बसों का न्यूनतम किराया बढ़ाकर राज्य सरकार फंस गई है। शनिवार को राज्य सचिवालय में हुई सुक्खू कैबिनेट की बैठक में किराया बढ़ोतरी को मंजूरी मिलने के बाद से लोगों में इस फैसले का जमकर विरोध किया जा रहा है। इसको देखते हुए सरकार बसों में रोजाना यात्रा करने वाले करीब 4 लाख लोगों को राहत देने के बारे में विचार कर रही है।
दो किमी तक 5 रुपए
सुक्खू कैबिनेट ने बसों का न्यूनतम किराया 5 रुपए से बढ़ाकर 10 रुपए कर दिया था। लेकिन चौतरफा विरोध को देखते हुए सुक्खू सरकार लोगों को राहत देने के लिए न्यूनतम किराए के 2 स्लैब बनाने का ऐलान कर सकती है।
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सूत्रों के अनुसार, पहले स्लैब में दो किलोमीटर तक की यात्रा के लिए न्यूनतम किराया 5 रुपए ही होगा। उसके बाद 4 किलोमीटर तक के लिए किराया 10 रुपए और उसके बाद की दूरी के लिए किराया पहले ही तरह 2.19 प्रति किलोमीटर ही रखा जाएगा। सूत्र बताते हैं कि लोगों के विरोध को देखते हुए बैकफुट पर आई सरकार नई दरों के हिसाब से अधिसूचना जारी करने की सोच रही है।
मंत्री भी विरोध में
जानकार सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट की बैठक में कई मंत्री बसों का किराया बढ़ाने के खिलाफ थे। लेकिन HRTC बिगड़ती माली हालत और प्रबंधन की ओर से कैबिनेट को अनुमोदन के लिए भेजे गए प्रस्ताव को देखते हुए सुक्खू सरकार ने ढाई दशक बाद न्यूनतम किराए में बढ़ोतरी का फैसला लिया।
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बस किराया बढ़ाने की मंजूरी
बस किराया बढ़ाने को मंजूरी का प्रस्ताव कैबिनेट में दूसरी बार लाया गया था। इसके कारण सरकार पर भी फैसला लेने का दबाव था। लेकिन इसका असल सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की बसों में रोजाना सवार होने वाले लाखों लोगों पर पड़ रहा है। उन्हें दो किलोमीटर तक सफर करने पर भी 10 रुपए देने पड़ रहे हैं।
पंचायत चुनाव में बनेगा मुद्दा
बस किराया बढ़ोतरी का मुद्दा अब राजनीतिक हो चुका है। भाजपा ने इसका जमकर विरोध किया है। माकपा ने भी पुरजोर तरीके से इस मुद्दे को उठाया है। इससे कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ गया है। अगर सरकार बस किराए में बढ़ोतरी पर बीच का रास्ता नहीं निकालती है तो उसे इस साल के आखिर में होने वाली पंचायती राज चुनाव में भी इसकी तपिश झेलनी पड़ सकती है।
