शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाआंे को बड़ी राहत प्रदान की है। सुक्खू सरकार ने शिक्षक भर्ती में युवाआंे को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी है। जिससे अब आयु सीमा पूरी होने के बाद भी युवा वर्ग शिक्षक पात्रता परीक्षाओं ;टीजीटी और जेबीटी के लिए आवेदन कर सकेंगे। सीएम सुक्खू ने इन भर्तियों के लिए अधिकतम आयु सीमा में दो वर्ष की छूट देने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की घोषणा के अनुसार अब 45 वर्ष की बजाय 47 वर्ष तक के अभ्यर्थी भी इन पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत
यह निर्णय उस पृष्ठभूमि में लिया गया है जब हमीरपुर स्थित राज्य चयन आयोग दो वर्षों तक लगभग निष्क्रिय रहा, जिसका मुख्य कारण पेपर लीक जैसे गंभीर प्रकरण थे। इस अवधि में भर्ती प्रक्रियाएं ठप रहीं, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आयु सीमा के दायरे से बाहर हो गए। इन्हीं युवाओं की मांग पर राज्य सरकार ने अब अधिकतम आयु सीमा में दो वर्ष की छूट देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
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सुक्खू सरकार के इस ऐलान के बाद शिक्षा सचिव ने शुक्रवार को इसको लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षा सचिव ने डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन को पत्र जारी कर दिया है, जिसकी एक प्रति राज्य चयन आयोग हमीरपुर को भी भेज दी गई है। सरकार के आदेश मिलने के बाद अब राज्य चयन आयोग को अपने ऑनलाइन फॉर्मेट पर आयु सीमा में बदलाव करना होगा, ताकि 47 साल अधिकतम आयु वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकें।
टीजीटी के 937 पदों पर आवेदन प्रक्रिया जारी
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग द्वारा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 937 पदों पर आवेदन प्रक्रिया जारी है। इसमें टीजीटी आर्ट्स के 425, नॉन-मेडिकल के 343 और मेडिकल के 169 पद शामिल हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन 30 मई 2025 से 3 जुलाई 2025 तक किए जा सकते हैं।
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जेबीटी के एक हजार पदों पर होगी भर्ती
इसी तरह से हिमाचल में जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) के 1000 से अधिक पदों की अधिसूचना भी शीघ्र जारी होने वाली है। ऐसे में आयु सीमा पूरी कर चुके अभ्यर्थियों को सरकार के इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी।
सरकार करवाएगी कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं
भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार अब कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित कराने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। इसके लिए सी.डैक जैसी तकनीकी संस्था के साथ एमओयू की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य की परीक्षाएं निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सुरक्षित हों।
