शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने प्रदेश के पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्र को एक बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने व्यावसायिक (Commercial) गैस सिलेंडरों के उपयोग के कोटे में भारी बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी कर दी है। अब तक उद्योगों और होटल व्यवसायियों को उनकी कुल खपत का केवल 20% कोटा ही मिल पा रहा था जिसे अब बढ़ाकर सीधे 70% कर दिया गया है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर रविवार से देखने को मिलेगा जब बद्दी स्थित गैस रिफिलिंग प्लांटों से प्रदेश भर में सिलेंडरों की आपूर्ति तेज हो जाएगी।

होटल और ढाबा मालिकों को सबसे बड़ी राहत

पर्यटन सीजन और कारोबारियों की मांग को देखते हुए सरकार ने कोटे के गणित में बड़ा बदलाव किया है:

  • होटल और ढाबे: इन्हें अब सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इनका कोटा 36% से बढ़ाकर 43% कर दिया गया है। इससे रेस्तरां और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को सिलेंडर की किल्लत नहीं झेलनी पड़ेगी।
  • स्कूल और अस्पताल: इनके कोटे में थोड़ी कटौती की गई है। शिक्षण संस्थानों का कोटा 37% से घटाकर 33% कर दिया गया है।
  • अन्य संस्थान: सोशल गैदरिंग, फार्मा उद्योग और सरकारी कैंटीन का कोटा भी 9% से घटाकर 8% कर दिया गया है।

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500 से ज्यादा नए उद्योगों को मिलेगा कनेक्शन

सरकार ने इस बार उन उद्योगों को भी राहत दी है जिन्हें पहले सिलेंडर आवंटित नहीं किए जाते थे। अब स्टील, ऑटोमोबाइल, कपड़ा रंगाई (Textile), प्लास्टिक और केमिकल उद्योगों को भी व्यावसायिक सिलेंडर मिल सकेंगे। 


शर्त सिर्फ एक है: इन उद्योगों का किसी गैस कंपनी में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है और वहां लोगों को रोजगार मिला होना चाहिए। इससे पहले केवल फार्मा और गत्ता उद्योगों को ही प्राथमिकता मिलती थी।

 

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आंकड़ों में समझें राहत का गणित

हिमाचल प्रदेश में रोजाना लगभग 6000 व्यावसायिक सिलेंडरों की जरूरत रहती है।

  • पुरानी स्थिति: 20% कोटे के कारण केवल 1200 सिलेंडर ही मिल पा रहे थे। 
  • नई स्थिति: 70% कोटा होने से अब रोजाना 4000 से अधिक सिलेंडर आसानी से उपलब्ध होंगे।

नई अधिसूचना तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ये सुनिश्चित करें कि किसी भी संस्थान को तय कोटे से अधिक सिलेंडर ना दिए जाएं ताकि वितरण व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।