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March 29, 2026

HPU में महंगी हुई पढ़ाई, 12 साल बाद बढ़ा फीस का बोझ- बिगड़ेगा छात्रों का बजट!

HPU को मिलने वाले बजट पर चली कैंची

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HPU Fee Increase

शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पढ़ने का सपना अब छात्रों की जेब पर भारी पड़ने वाला है। पिछले 12 सालों से शांत पड़ा फीस का जिन्न अब बाहर आ चुका है। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (EC) ने वित्तीय बदहाली और सरकार से मिलने वाले बजट में भारी कटौती के बाद फीस वृद्धि पर अंतिम मुहर लगा दी है। यानी अगले शैक्षणिक सत्र से कैंपस की पढ़ाई 'किफायती' नहीं रह जाएगी।

सरकार ने खींचे हाथ, छात्रों पर पड़ा भार

विश्वविद्यालय इस वक्त गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में ऐसी कैंची चलाई है कि अब HPU को 145 करोड़ रुपये से भी कम का बजट मिलने की उम्मीद है। इसी वित्तीय तंगहाली का हवाला देते हुए शनिवार को कुलपति प्रो. महावीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में फीस बढ़ाने का कड़वा फैसला लिया गया। करीब दो घंटे चली इस माथापच्ची के बाद ये साफ हो गया कि अब घाटे की भरपाई विद्यार्थियों की फीस से की जाएगी।

 

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कितना बढ़ेगा आर्थिक बोझ ?

भले ही विश्वविद्यालय प्रशासन इसे 'मामूली वृद्धि' का नाम दे रहा है लेकिन हकीकत ये है कि लगभग सभी मदों पर फीस बढ़ना तय है।

  • वृद्धि का दायरा: सूत्रों के मुताबिक अलग-अलग कैटेगरी में 3% से लेकर 10% तक की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। 
  • 30% तक का झटका: कुछ विशेष मदों में ये वृद्धि 10% से लेकर 30% तक भी जा सकती है। 
  • तुलना का तर्क: ईसी की बैठक में तर्क दिया गया कि पड़ोसी राज्यों के विश्वविद्यालयों की तुलना में HPU की फीस बहुत कम है इसलिए इसे बढ़ाना जरूरी है।

12 साल का सूखा खत्म, अब बढ़ेगा खर्चा

HPU में आखिरी बार फीस वृद्धि वर्ष 2014 में हुई थी। तब से लेकर अब तक यानी पिछले 12 वर्षों से फीस स्ट्रक्चर जस का तस था। हालांकि नियमों के अनुसार हर साल 10% बढ़ोतरी का प्रावधान था लेकिन इसे लागू नहीं किया गया था। अब एक साथ बढ़ी हुई फीस का बोझ नए छात्रों के बजट को बिगाड़ने के लिए काफी है।

 

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बजट में कटौती और नई नियुक्तियां

विश्वविद्यालय का बजट अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है लेकिन ये तय है कि इस बार भी 'घाटे का बजट' ही पेश होगा। एक तरफ फीस बढ़ाई जा रही है तो दूसरी तरफ संसाधनों को जुटाने की कोशिश भी जारी है:

  • नई बस: विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एक नई बस खरीदी जाएगी।
  • भर्तियां: 7 सहायक आचार्यों (Assistant Professors) के पदों को भरने की स्वीकृति दी गई है।
  • गैर-शिक्षक पद: खाली पड़े गैर-शिक्षक पदों को भरने के लिए सरकार से चर्चा की जाएगी।

छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा नया सत्र

बैठक में प्रो-वाइस चांसलर प्रो. राजेंद्र वर्मा, विधायक हरीश जनार्था और शिक्षा व वित्त विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे। कुलपति ने हालांकि जोर दिया कि बोझ मामूली हो लेकिन महंगाई के इस दौर में 3% से 30% तक की कोई भी वृद्धि छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगी। 

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