शिमला। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगार बैठे युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। अब हिमाचल के युवाओं को नौकरी नहीं मांगनी पड़ेगी, बल्कि हिमाचल के युवा अब नौकरी देंगे। दरअसल, प्रदेश सरकार ने युवाओं के लिए एक अहम पहल की है।

हिमाचल के युवा नहीं मांगेंगे रोजगार

आपको बता दें कि पॉलिटेक्निक कॉलेजों और ITI संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को अब स्टार्टअप शुरू करने के लिए सरकारी स्तर पर आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिलेगा। इसके लिए सरकार ने दो करोड़ रुपये का नवाचार फंड गठित किया है, जिससे युवाओं के नए विचारों को जमीन पर उतारा जा सके।

 

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रोजगार देने वाले बनेंगे युवा

सरकार का स्पष्ट मानना है कि तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं में हुनर और नवाचार की कमी नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन और शुरुआती सहयोग की। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को नौकरी की तलाश करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला उद्यमी बनाना है। इससे न केवल बेरोजगारी की समस्या कम होगी, बल्कि प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

बहुत अलग है यह मॉडल

यह पहल उद्योग विभाग की मौजूदा स्टार्टअप योजनाओं से अलग है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने अपनी एक स्वतंत्र रूपरेखा तैयार की है, जिसके तहत पॉलिटेक्निक और आईटीआई छात्रों को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। विभाग ने पहले भी छात्रों से स्टार्टअप के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन उस समय अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई थी।

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जोखिम से डर रहे छात्रों को मिलेगा सहारा

तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी का कहना है कि इन संस्थानों के छात्रों में कुछ नया करने की प्रबल इच्छा है, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे जोखिम उठाने से पीछे हट जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए अब सरकार ने एक नया रास्ता चुना है। इसके तहत स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक छात्रों को किसी स्थापित कंपनी के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि वे अनुभव भी हासिल कर सकें और जोखिम भी कम हो।

कंपनियों से जोड़कर मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

इस नई व्यवस्था में छात्र सीधे बाजार और उद्योग की वास्तविक जरूरतों को समझ सकेंगे। कंपनियों के साथ काम करते हुए वे अपने विचारों को परिपक्व बना पाएंगे और आगे चलकर खुद का स्टार्टअप शुरू करने का आत्मविश्वास भी विकसित होगा। इससे पढ़ाई और उद्योग के बीच की दूरी भी कम होगी।

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2026 में खुद छात्रों के साथ जाएंगे मंत्री

तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी 4 जनवरी को होने वाले हिम MSME फेस्ट-2026 में विभाग के अधीन संचालित संस्थानों के छात्रों को स्वयं साथ लेकर पहुंचेंगे। इस दौरान छात्रों की मुलाकात सफल स्टार्टअप संचालकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों से कराई जाएगी। इसका मकसद युवाओं को वास्तविक उदाहरण दिखाकर प्रेरित करना है, ताकि वे स्टार्टअप को एक व्यवहारिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में देख सकें।

बाहर भेजे छात्रों से मिले नए आइडिया

मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में विभाग ने छात्रों को प्रदेश के बाहर सफल उद्यमियों और व्यवसायिक संस्थानों के पास भेजने की प्रक्रिया शुरू की थी। वहां से लौटकर छात्रों ने नवाचार से जुड़े कई प्रभावी आइडिया प्रस्तुत किए हैं। इन विचारों को अब मूल्यांकन के लिए भेजा गया है और जल्द ही इन्हें व्यवहारिक रूप देने की दिशा में काम शुरू होगा।

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जल्द दिखेंगे सकारात्मक परिणाम

सरकार को उम्मीद है कि इस नवाचार फंड और नई रणनीति के माध्यम से तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवा आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएंगे। आने वाले समय में प्रदेश में ऐसे कई स्टार्टअप सामने आएंगे, जो न सिर्फ युवाओं को रोजगार देंगे, बल्कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देंगे।

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