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January 1, 2026

अधूरा रह जाएगा सुक्खू सरकार का सपना! विक्रमादित्य से बोले ग्रामीण- नए शहर को नहीं देंगे जमीन

जाठिया में नया शहर निर्माण को लेकर मंत्री विक्रमादित्य से मिले ग्रामीण

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vikramaditya singh

शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला की बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक से राहत दिलाने के लिए सुक्खू सरकार नया शहर बसाने का सपना देख रही है, लेकिन इस योजना के रास्ते में अब ग्रामीणों की सख्त आपत्तियां सामने आने लगी हैं। जाठिया देवी के आसपास प्रस्तावित नए शहर को लेकर स्थानीय लोग खुलकर विरोध में उतर आए हैं। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में सरकार को संदेश दिया है, वे अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, चाहे परियोजना कितनी ही बड़ी क्यों न हो।

नए शहर के सपने में ग्रामीणों का विरोध

दरअसल जाठिया देवी क्षेत्र के पास नया शहर बसाने की योजना पर अब असहमति के स्वर तेज हो गए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए हिमुडा द्वारा करीब 282 बीघा भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है और आगे की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी रिहायशी और खेती योग्य जमीन को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेंगे।

 

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मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मिले ग्रामीण

जाठिया देवी क्षेत्र के स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मिला और अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं। ग्रामीणों ने मांग की कि नया शहर केवल उसी भूमि पर विकसित किया जाए, जिसे पहले ही हिमुडा द्वारा अधिग्रहित किया जा चुका है। उनका कहना है कि यदि परियोजना का दायरा बढ़ाया गया तो इससे उनके घर, खेत और आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

बिना सहमति नहीं ली जाएगी एक इंच जमीन

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी भावनाओं को नजरअंदाज नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पहले से अधिग्रहित भूमि के बाहर किसी भी रिहायशी क्षेत्र, उपजाऊ कृषि भूमि या शामलात जमीन को स्थानीय लोगों की सहमति के बिना हाथ नहीं लगाया जाएगा। शिमला ग्रामीण के विधायक होने के नाते उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की बात सरकार के समक्ष मजबूती से रखी जाएगी।

 

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जनरल हाउस मीटिंग से तय होगी आगे की दिशा

मंत्री ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले पर जल्द ही एक जनरल हाउस मीटिंग बुलाई जाएगी] जिसमें वे स्वयं ग्रामीणों से सीधा संवाद करेंगे। सरकार जनमत के साथ आगे बढ़ेगी और स्थानीय सहमति के बिना कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि विकास और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

 

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बागी पंचायत में सबसे ज्यादा रोष

गौरतलब है कि इस प्रस्ताव को लेकर बागी पंचायत और आसपास के गांवों में भारी रोष देखा जा रहा है। बागी पंचायत के तहत आने वाले आठ राजस्व गांवों की भूमि इस परियोजना के दायरे में आने की चर्चा से ग्रामीण चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि भविष्य में करीब 3000 बीघा से अधिक भूमि अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है, जिसे वे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे।

 

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क्या है सरकार की योजना

प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के पहले चरण में 119 फ्लैट्स के अलावा वन, टू और थ्री बीएचके आवास, विला और इको-रिजॉर्ट विकसित करने की योजना है। सरकार इसे शिमला के दबाव को कम करने और सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, लेकिन ग्रामीण इसे अपनी जमीन और पहचान पर खतरा बता रहे हैं।

सहमति बनना बनी सबसे बड़ी चुनौती

फिलहाल जाठिया देवी में नया शहर बसाने की योजना सरकार और ग्रामीणों के बीच टकराव का विषय बनी हुई है। सुक्खू सरकार के शहरी विकास के सपने और ग्रामीणों के जमीन बचाने के संकल्प के बीच सहमति बनना बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित जनरल हाउस मीटिंग और आगे की बातचीत ही तय करेगी कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना आगे बढ़ेगी या विरोध की दीवार में अटक जाएगी।

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