शिमला। हिमाचल प्रदेश में मुफ्त बिजली के दिन खतरे में हैं। प्रदेश की सुक्खू सरकार बिजली सब्सिडी के खेल को खत्म करने के लिए बड़े एक्शन की तैयारी में है। राज्य बिजली बोर्ड के ताजा सर्वे में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सरकार के होश उड़ा दिए हैं- जैसे प्रदेश में कई रसूखदार परिवार एक ही नाम पर 40-40 मीटर लगवाकर सरकारी सब्सिडी डकार रहे हैं।

एक परिवार, अनगिनत मीटर- लग रहा चूना

हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का प्रावधान है। लेकिन इस सुविधा का लाभ जरूरतमंदों से ज्यादा वो लोग उठा रहे हैं जिन्होंने अपने घरों या संपत्तियों में कई-कई मीटर लगवा रखे हैं। बिजली बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्जनों मीटर चल रहे हैं, जिससे सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है।

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क्या है बिजली बोर्ड का नया प्रस्ताव ?

लगातार बढ़ते घाटे और वित्तीय बोझ को देखते हुए बिजली बोर्ड ने सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:

  • लिमिट तय होगी: अब एक परिवार में सभी मीटरों पर सब्सिडी नहीं मिलेगी। बोर्ड ने सुझाव दिया है कि सब्सिडी को अधिकतम 2 या 4 मीटरों तक ही सीमित कर दिया जाए।
  • डाटा खंगालना शुरू: बोर्ड ने उन उपभोक्ताओं की सूची तैयार कर ली है जिनके नाम पर जरूरत से ज्यादा मीटर लगे हैं।
  • टारगेटेड सब्सिडी: सरकार का इरादा रेवड़ी कल्चर को रोककर केवल उन लोगों को लाभ देने का है जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।

बजट में हो सकता है बड़ा धमाका

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आगामी बजट सत्र में इस नई बिजली नीति की घोषणा कर सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इस कदम से ना केवल बिजली बोर्ड की आर्थिक सेहत सुधरेगी, बल्कि प्रदेश के राजस्व की भी बचत होगी। "जब सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है, तो एक ही नाम पर 40 मीटरों को सब्सिडी देना न्यायसंगत नहीं है।" — यह संदेश सरकार की ओर से साफ तौर पर दिया जा रहा है।

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आम जनता पर क्या होगा असर ?

अगर ये नई नीति लागू होती है तो:

  • मिडिल क्लास: जिन घरों में एक या दो मीटर हैं, उन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
  • बड़े घर/किरायेदार: जिन लोगों ने किराए के कमरों या बड़े बंगलों में कई मीटर लगवा रखे हैं, उन्हें अब अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।
  • पारदर्शिता: बिजली बिलिंग और सब्सिडी वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी हो जाएगी।

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हिमाचल सरकार इस समय हर उस रास्ते को बंद कर रही है जहां से सरकारी पैसे की बर्बादी हो रही है। मुफ्त बिजली की व्यवस्था को तार्किक बनाना इसी कड़ी का हिस्सा है। बजट के बाद ये साफ हो जाएगा कि आपकी रसोई और कमरों में जलने वाले कितने बल्बों का खर्च सरकार उठाएगी और कितनों का बिल आपको खुद भरना होगा।