शिमला। आजकल ज्यादातर दुकानों में लोगों ने बिल बनाने के लिए कंप्यूटर या लैपटॉप रखे हुए हैं। वहीं, दफ्तरों में भी दिनभर कंप्यूटर व लैपटॉप पर ही काम किया जाता है। कामकाज ही नहीं कंप्यूटर हमारे मनोरंजन का भी एक बड़ा माध्यम बन दया है। हालांकि, इसके हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

क्या पड़ रहा असर?

इन प्रभावों को समझना और उन्हें कम करने के उपाय अपनाना बहुत जरूरी है, नहीं तो आपको बहुत परेशानी हो सकती है। इन उपायों को अपनाकर आप कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने से होने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं और अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। यह भी पढ़ें: “हिमाचल पुलिस ने कुछ नहीं किया, अपनी बेटी को हमने खोजा- CBI जांच हो”

क्या हो रहा नुकसान?

आमतौर में दफ्तरों में लोग 8 से 10 घंटे कंप्यूटर पर काम करते हैं। ऐसे में स्क्रीन का सीधा असर आंखों पर पड़ता है। लगातार कंप्यूटर पर काम करने के कारण लोगों को सिर, गर्दन, पीठ दर्द आदि जैसी कई समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। आज हम आपको 20-20-20 नियम के बारे में बताएंगे-जिसे अपनाने से आप कंप्यूटर के साइड इफेक्ट्स से बच सकते हैं।

क्या आती हैं दिक्कतें?

  • आंखों पर प्रभाव (डिजिटल आई स्ट्रेन):
कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने से आंखों में थकान, सूखापन, और जलन महसूस हो सकती है। इसे डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम कहा जाता है। लगातार स्क्रीन पर देखने से सिरदर्द, धुंधला दिखना, और आंखों में पानी आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • शारीरिक समस्याएं:
गर्दन और पीठ में दर्द-
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से गर्दन और पीठ में दर्द हो सकता है। गलत पॉस्चर से यह समस्या और भी बढ़ सकती है।
कंधे और कलाई में दर्द-
माउस और कीबोर्ड का लंबे समय तक उपयोग करने से कंधे, कलाई, और हाथों में दर्द, सूजन या कार्पल टनल सिंड्रोम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह भी पढ़ें: जेजों खड्ड हाद*सा: चौथे दिन रेत में दबे मिले बाढ़ में बहे जीजा-साली के श*व
  • मानसिक थकान और तनाव:
कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने से मानसिक थकान, चिंता, और तनाव बढ़ सकता है। लगातार काम का दबाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ब्रेक न लेने से कार्यक्षमता और एकाग्रता में कमी आ सकती है।
  • नींद पर प्रभाव:
लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे सोने में कठिनाई हो सकती है।
  • शारीरिक गतिविधि की कमी:
कंप्यूटर पर काम करते समय लंबे समय तक बैठे रहने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मोटापा, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यह भी पढ़ें: कौन हैं ASI रंजना शर्मा? क्यों मिल रहा विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक!

क्या है 20-20-20 नियम?

शारीरिक और मानसिक रूप से स्वास्थ्य रहने के लिए-
  • अपनाएं 20-20-20 नियम
हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
  • पॉस्चर सही रखें
कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें और बैठने की स्थिति सही रखें।
  • ब्रेक लें
हर घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक लें, चलें-फिरें और स्ट्रेचिंग करें।
  • नीली रोशनी को कम करें
ब्लू लाइट फिल्टर या एंटी-ग्लेयर स्क्रीन का उपयोग करें।
  • हाइड्रेटेड रहें
पर्याप्त पानी पिएं और आंखों को बार-बार धोएं।

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