शिमला। हिमाचल प्रदेश की कमजोर होती अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूती देने के लिए एक ओर जहां राज्य सरकार लगातार सख्त वित्तीय फैसले ले रही है, वहीं दूसरी तरफ वर्षों से लंबित पड़े प्रदेश के कानूनी और वित्तीय अधिकारों को हासिल करने की लड़ाई भी तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ शब्दों में कहा है कि हिमाचल प्रदेश के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। चाहे भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये हों, बिजली का अधिकार हो या फिर चंडीगढ़ की परिसंपत्तियों में प्रदेश का हिस्सा, राज्य सरकार अपना हर वैधानिक हक लेकर रहेगी।
आर्थिक चुनौतियों के बीच अधिकारों की लड़ाई हुई तेज
प्रदेश इस समय आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहा है। सरकार खर्चों पर नियंत्रण, राजस्व बढ़ाने और वित्तीय सुधारों के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि केवल आंतरिक सुधारों से ही नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित पड़े प्रदेश के वैधानिक अधिकार हासिल करके भी हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार हर उस मामले की मजबूती से पैरवी कर रही है, जहां हिमाचल का वैधानिक अधिकार बनता है लेकिन लंबे समय से उसे उसका लाभ नहीं मिल पाया है।
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बीबीएमबी से 4,200 करोड़ का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में हिमाचल प्रदेश का लगभग 4,200 करोड़ रुपये का वित्तीय बकाया और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली का अधिकार वर्षों से लंबित है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय करीब 15 वर्ष पहले इस मामले में हिमाचल के पक्ष में फैसला दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद राज्य को उसका पूरा अधिकार नहीं मिला।
उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से आगे बढ़ा रही है और हिमाचल के हिस्से का एक-एक रुपया तथा बिजली का अधिकार प्राप्त करने के लिए हर कानूनी विकल्प अपनाया जाएगा।
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चंडीगढ़ में हिस्सेदारी पर भी सरकार अडिग
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल प्रदेश का 7.19 प्रतिशत वैधानिक हिस्सा बनता है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि प्रदेश का कानूनी अधिकार है और सरकार इसे हर मंच पर मजबूती से उठा रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी हिमाचल के दावे को उचित ठहरा चुका है और सरकार इस अधिकार को हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।
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शानन परियोजना भी सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि परियोजना की लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद इसे अभी तक हिमाचल प्रदेश को वापस नहीं सौंपा गया है। सरकार इस मामले को भी कानूनी स्तर पर मजबूती से लड़ रही है और फिलहाल यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
सरकार को मिली बड़ी सफलताएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्रभावी पैरवी के कारण कई वर्षों से लंबित मामलों में हिमाचल को राहत मिली है। उन्होंने वर्ष 2002 से कानूनी विवाद में फंसे वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में राज्य के पक्ष में मिली सफलता का उल्लेख किया। इसके अलावा 1,045 मेगावाट कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना की रॉयल्टी से जुड़े मामले में भी सरकार को महत्वपूर्ण सफलता मिली है, जिससे राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
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किशाऊ परियोजना से भविष्य में होगा बड़ा आर्थिक लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना भविष्य में हिमाचल की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी। परियोजना पूरी होने पर प्रदेश को हर वर्ष करीब 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसकी अनुमानित वार्षिक कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये होगी। इससे राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
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'हिमाचल के अधिकार लेकर रहेंगे'
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दो टूक कहा कि प्रदेश सरकार किसी भी कीमत पर हिमाचल प्रदेश के वैधानिक अधिकारों से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि चाहे बीबीएमबी से मिलने वाले 4,200 करोड़ रुपये, बिजली का हिस्सा, चंडीगढ़ की परिसंपत्तियों में 7.19 प्रतिशत अधिकार या अन्य लंबित मामले हों, सरकार हर मोर्चे पर मजबूती से लड़ाई लड़ रही है और प्रदेश का हक लेकर रहेगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से मजबूत हिमाचल के निर्माण के लिए वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ प्रदेश के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
