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September 20, 2026
हिमाचल के किसानों को मालामाल बना रहा ड्रैगन फ्रूट- कीमत सुन हर कोई हैरान
ड्रैगन फ्रूट की बंपर पैदावार ने बढ़ाई बागवानों की कमाई
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की गर्म जलवायु में कभी प्रयोग के तौर पर शुरू हुई ड्रैगन फ्रूट की खेती अब किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बनती जा रही है। जिले में इस विदेशी फल ने ऐसी पकड़ बनाई है कि खेतों से निकलने वाली फसल स्थानीय बाजार में पहुंचने से पहले ही बिक रही है। इस साल अब तक ऊना में करीब 11.2 मीट्रिक टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हो चुका है।
जिले में लगभग छह हेक्टेयर जमीन पर इसकी खेती हो रही है। खास बात यह है कि ऊना के ड्रैगन फ्रूट की मांग सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली तक इसके खरीदार पहुंच रहे हैं। बेहतर गुणवत्ता और मांग के चलते इस सीजन में कई बागवानों को प्रति फल 80 से 100 रुपये तक का भाव मिला है। पिछले वर्षों में यही फल करीब 50 रुपये तक बिकता था।
अंब के आदर्श नगर के रहने वाले बागवान मुस्ताक गुज्जर ने वर्ष 2018 में महज तीन कनाल जमीन से ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी। शुरुआती दौर में उन्हें पांच से छह क्विंटल तक उत्पादन मिला। अनुभव बढ़ा तो उन्होंने खेती का दायरा भी बढ़ा दिया।
आज वह करीब 13 कनाल क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट उगा रहे हैं और इस सीजन में जून से अब तक लगभग 45 क्विंटल उत्पादन ले चुके हैं। उनके मुताबिक स्थानीय स्तर पर ही फल की इतनी मांग है कि कई बार पूरी फसल बाजार में पहुंचने से पहले ही बिक जाती है।
बागवान रीवा सूद की कहानी भी ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती संभावनाओं को दिखाती है। उन्होंने वर्ष 2017 में लगभग दो हजार पौधों से खेती की शुरुआत की थी। आज उनके खेत में करीब 30 हजार पौधे हैं।
इस सीजन में वह करीब ढाई टन ड्रैगन फ्रूट बेच चुकी हैं। उन्हें भी प्रति फल 80 से 100 रुपये तक का दाम मिला है। ऊना के अलावा दिल्ली के बाजार से भी उनके उत्पाद की मांग सामने आ रही है।
बदोली के विवेक जोशी ने करीब दो साल पहले ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। उन्होंने लगभग 100 पौधे लगाए हैं और एक पौधे से करीब एक किलो तक उत्पादन मिल रहा है।
हालांकि शुरुआत उनके लिए आसान नहीं रही। खेती की तकनीक और पौधों की देखभाल को लेकर पर्याप्त जानकारी न होने के कारण शुरुआती दौर में परेशानियां आईं। धीरे-धीरे तकनीक समझने और सही पोषण व सिंचाई व्यवस्था अपनाने के बाद उत्पादन में सुधार होने लगा।
ऊना जिले के लोअर बढ़ेड़ा, सलोह, पंजावर, पीपली, गुगलैहड़, कलोह, अंब, बदमाणा, चिंतपूर्णी और लोहारली समेत कई क्षेत्रों में किसान ड्रैगन फ्रूट उगा रहे हैं। जून के अंतिम सप्ताह से इसकी तुड़ाई शुरू हो जाती है और मौसम व फसल के अनुसार दिसंबर-जनवरी तक उत्पादन जारी रह सकता है।
उद्यान विभाग के मुताबिक जिले में ड्रैगन फ्रूट का रकबा आने वाले समय में और बढ़ सकता है। उपनिदेशक उद्यान डॉ. केके भारद्वाज के अनुसार इस फल में एंटीऑक्सीडेंट गुण होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर यानी MIDH के तहत किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 3.37 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जा रही है।