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August 6, 2026

हिमाचल में यहां धंसने लगा पूरा पहाड़, 150 से अधिक घरों में आई दरारें, डर के साये में ग्रामीण

हर बारिश के साथ बढ़ रहा खतरा, लोगों की उड़ रही रातों की नींद

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shimla News

शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून लगातार तबाही की नई-नई तस्वीरें सामने ला रहा है। कहीं बादल फटने से आई बाढ़ गांवों को उजाड़ रही है, तो कहीं भूस्खलन पहाड़ों को निगल रहा है। अब राजधानी शिमला से बेहद सटे मल्याणा पंचायत के शकराला क्षेत्र में बारिश ने ऐसा संकट खड़ा कर दिया है कि पूरा पहाड़ धीरे-धीरे धंसता नजर आ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि करीब 150 से अधिक मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और सैकड़ों लोग हर पल डर के साये में जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।

हर बारिश के साथ बढ़ रहा खतरा, लोगों की उड़ गई नींद

शकराला क्षेत्र में रहने वाले परिवारों का कहना है कि मानसून शुरू होते ही उनकी चिंता कई गुना बढ़ जाती है। घरों की दीवारों, फर्श और आंगनों में लगातार बढ़ती दरारें इस बात का संकेत दे रही हैं कि जमीन धीरे-धीरे अपनी पकड़ खो रही है। कई मकानों तक जाने वाले रास्ते और सीढ़ियां भी एक ओर झुक गई हैं, जिससे लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही तक मुश्किल हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें हर पल इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं रात के अंधेरे में कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

 

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खतरे की जद में 150 से ज्यादा मकान 

क्षेत्र में करीब डेढ़ सौ से अधिक भवन मौजूद हैं और अधिकांश मकानों में दरारें उभर चुकी हैं। लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई से घर बनाए, लेकिन अब वे हर साल मरम्मत कराने को मजबूर हैं। दीवारों की मरम्मत और प्लास्टर करवाने के कुछ ही समय बाद दरारें फिर से दिखाई देने लगती हैं। कुछ समय पहले एक मकान इतना असुरक्षित हो गया था कि उसे गिराकर दोबारा बनाना पड़ा, लेकिन नया भवन भी धंसाव की चपेट से नहीं बच सका और उसमें भी चारों तरफ दरारें उभर आई हैं।

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दशकों पुरानी समस्या] लेकिन अब मानसून ने बढ़ाया संकट

स्थानीय लोगों के अनुसार शकराला की यह पहाड़ी पिछले कई दशकों से धीरे-धीरे धंस रही है, लेकिन इस बार लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। लोगों का मानना है कि पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में नेशनल हाईवे और नीचे फोरलेन निर्माण के दौरान हुई कटिंग ने भी जमीन की स्थिरता को प्रभावित किया है। बरसात के दौरान पानी का दबाव बढ़ने से धंसाव की रफ्तार और तेज होती दिखाई दे रही है।

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अपने दम पर बचाव में जुटे ग्रामीण

सरकारी मदद का इंतजार करते-करते स्थानीय लोगों ने खुद ही समाधान तलाशने की कोशिश शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने आपस में करीब आठ लाख रुपये एकत्र कर भवनों की छतों और बाथरूम से निकलने वाले पानी की उचित निकासी के लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया है। लोगों का मानना है कि बारिश का पानी जमीन में लगातार रिसने से भी धंसाव बढ़ रहा है। यदि पानी की निकासी बेहतर होगी तो खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

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ग्रामीण बोले— अब घर छोड़ने की नौबत आ गई

शकराला के कई परिवारों का कहना है कि लगातार बढ़ती दरारों को देखकर अब वे अपने मकान छोड़ने तक पर विचार कर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है। रास्तों में आई दरारों और झुकी हुई सीढ़ियों के कारण लोगों का पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

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विशेषज्ञों से सर्वे कराने की उठी मांग

स्थानीय निवासियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों और आपदा विशेषज्ञों की टीम भेजकर पूरे क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए। लोगों का कहना है कि धंसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाकर स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि सैकड़ों परिवारों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल अस्थायी मरम्मत से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक जांच और दीर्घकालिक सुरक्षा योजना की तत्काल आवश्यकता है।

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