#राजनीति
August 6, 2026
हिमाचल में सुधीर - होशियार के बाद अब विजिलेंस के राडार पर एक और भाजपा नेता, गरमाई सियासत
पूर्व एमएलए चैतन्य शर्मा पर ठेका देने के लिए आठ लाख एंठने का आरोप
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। कांग्रेस का हाथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कमल थामने वाले नेताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य में सुधीर शर्मा और पूर्व विधायक होशियार सिंह के बाद अब एक और भाजपा नेता विजिलेंस के सीधे निशाने पर आ गए हैं। भाजपा नेताओं के खिलाफ एक के बाद एक हो रही कड़ी कानूनी व विजिलेंस कार्रवाइयों ने प्रदेश के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
अब विजिलेंस के रडार पर गगरेट के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा हैं। सूत्रों के अनुसार लोक निर्माण विभाग (PWD) के ठेके दिलाने के नाम पर 8 लाख रुपये के कथित लेन-देन के मामले में विजिलेंस ने चैतन्य शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17-ए के तहत मामला दर्ज करने और अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) के लिए सक्षम प्राधिकारी को प्रस्ताव भेज दिया है। हरी झंडी मिलते ही विजिलेंस एफआईआर दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर देगी।
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प्रदेश में पिछले कुछ समय से विजिलेंस की सक्रियता राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बनी हुई है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं पर एक के बाद एक जांच और कार्रवाई ने सियासी माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है। अब गगरेट के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा का नाम भी इस सूची में जुड़ने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
पूरा मामला ऊना जिले के एक सरकारी ठेकेदार की शिकायत पर आधारित बताया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 में लोक निर्माण विभाग के सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि छह लाख रुपये बैंक खाते के माध्यम से ट्रांसफर किए गए, जबकि दो लाख रुपये नकद दिए गए। आरोप यह भी है कि पूरी राशि देने के बावजूद न तो कोई सरकारी टेंडर मिला और न ही पैसा लौटाया गया। इसके बाद शिकायत पुलिस तक पहुंची और अब मामला विजिलेंस की जांच के दायरे में है।
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बुधवार को शिमला में कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा की रैली के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया कि चैतन्य शर्मा के खिलाफ भी विजिलेंस कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बन गया।
दूसरी ओर चैतन्य शर्मा पहले ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्ति से कोई पैसा नहीं लिया और न ही उनके बैंक खाते में कोई रकम आई। उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप झूठे साबित होते हैं तो वह शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
इससे पहले देहरा के पूर्व विधायक और भाजपा नेता होशियार सिंह के खिलाफ विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग के मामले में विजिलेंस एफआईआर दर्ज कर चुकी है। वहीं भाजपा विधायक सुधीर शर्मा से जुड़े मामलों को लेकर भी लगातार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब चैतन्य शर्मा पर विजिलेंस का शिकंजा कसने की तैयारी ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक गरमा सकती है।
वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। बाद में सभी नेता भाजपा में शामिल हो गए। उपचुनाव में सुधीर शर्मा चुनाव जीतने में सफल रहे, जबकि चैतन्य शर्मा को हार का सामना करना पड़ा।