शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने पहले तो उन्हें चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया। उनके लिए सुखाश्रय योजना शुरू की और अब सरकार ने विभिन्न बाल संस्थानों में रहने वाले अनाथ बच्चों को बोनाफाइड हिमाचली का प्रमाण पत्र दे दिया है। इस प्रमाण पत्र के सहारे ये अनाथ बच्चे नौकरी के लिए अप्लाई कर पाएंगे और उन्हें लोन भी मिल सकेगा।
अनाथ बच्चों की बदली जिंदगी
CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पिछले साल 30 अक्टूबर को शिमला के टूटीखंडी बाल आश्रम में इन अनाथ बच्चों के साथ मुलाकात के दौरान डीसी शिमला को इन बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का रास्ता सुझाने को कहा था। सोमवार को सरकार ने 6000 अनाथ बच्चों को हिमाचल प्रदेश का बोनाफाइड सर्टिफिकेट दे दिया। यह सुविधा बीते 15 साल से हिमाचल में रह रहे अनाथ बच्चों को मिली है।
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CM का बाल आश्रम से पुराना है नाता
दो साल पहले सीएम चुने जाने के बाद सुक्खू ने शपथ ग्रहण से पहले शिमला के टूटीखंडी आश्रम का दौरा किया था। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और फिर उनकी सरकार ने अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया। ऐसा करने वाला हिमाचल प्रदेश भारत का पहला राज्य बन गया। फिर उनकी सरकार ने अनाथ बच्चों की शिक्षा, देखभाल और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए "मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना" शुरू की।
नौकरी के लिए कर सकेंगे आवेदन
बोनाफाइड प्रमाण पत्र मिलने के बाद इन अनाथ बच्चों को अम हिमाचलियों की तरह नौकरी का आवेदन करने, स्कूल-कॉलेजों में दाखिला लेने से लेकर मकान बनाने के लिए लोन लेने तक की सुविधा मिलने लगेगी। इन बच्चों के अधिकार आम हिमाचली नागरिकों की तरह ही होंगे। अभी इन बच्चों को सुखाश्रय योजना के तहत भारत भ्रमण, शैक्षिक यात्राएं, प्रति माह 4,000 रुपये की पॉकेट मनी, 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को 1,000 रुपये मासिक सहायता, 15 से 18 साल के बच्चों और एकल महिलाओं को 2,500 रुपये प्रतिमाह सहायता मिलती है।
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मिलेगी 3 बीघा जमीन
बोनाफाइड सर्टिफिकेट के बाद ये बच्चे अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए 2 लाख रुपये का लोन ले पाएंगे। इसके अलावा खेती या आवास के लिए 3 बीघा जमीन और 3 लाख रुपये का लोन लेने की हकदारी भी मिल गई है।
