मंडी। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के आने से वोट बैंक की राजनीति का अंत होगा और गरीब एवं पिछड़े मुस्लिम वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा।
लोकसभा में विधेयक का स्वागत
जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक लाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कांग्रेस और विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है और वर्षों तक उन्हें गुमराह कर राजनीतिक लाभ उठाया है।
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उन्होंने कहा, "वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक से गरीब और पिछड़े मुस्लिमों को फायदा मिलेगा, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। यह साबित करता है कि उन्होंने केवल इस वर्ग को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया है।"
जयराम ठाकुर का तंज, विरोध क्यों?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस और INDI गठबंधन के कई दल इस विधेयक के विरोध में खड़े हो गए हैं। उनका मानना है कि ये दल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने के खिलाफ हैं क्योंकि इससे उनके वोट बैंक की राजनीति पर असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड के नाम पर कुछ प्रभावशाली लोग गलत तरीके से संपत्तियों का उपयोग कर रहे थे और इस विधेयक के जरिए अब इस पर रोक लगेगी।
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भाजपा का रुख स्पष्ट
भाजपा के रुख को स्पष्ट करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि पार्टी शुरू से ही वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता लाने और गरीबों को न्याय दिलाने के पक्ष में रही है। उन्होंने कहा, "भाजपा की सरकार ने यह विधेयक लाकर मुस्लिम समाज के पिछड़े और गरीब वर्ग के हित में बड़ा कदम उठाया है। यही कारण है कि मुस्लिम समाज के पूंजीपति इस बिल के खिलाफ हैं, जबकि गरीब तबका इसका खुलकर समर्थन कर रहा है।"
क्या है वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक?
गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड देश में मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों की देखरेख करता है। संशोधन विधेयक लाने का मकसद इन संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ाना और इसका सही उपयोग सुनिश्चित करना है। भाजपा का दावा है कि इससे गरीब और पिछड़े वर्गों को अधिक लाभ मिलेगा, जबकि संपत्तियों का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
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बहरहाल, वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को लेकर हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में सियासी माहौल गर्म है। भाजपा इसे गरीब और पिछड़े मुस्लिम समुदाय के लिए लाभकारी बता रही है, जबकि कांग्रेस और विपक्षी दल इसे सामुदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास करार दे रहे हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया से यह साफ है कि आने वाले दिनों में इस पर और अधिक बहस होगी।
