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March 13, 2026

दिल्ली में गूंजी हिमाचल की आवाज: विक्रमादित्य ने केंद्र से मांगाी पहाड़ी राज्य के लिए 'पहाड़' जैसी मदद

विक्रमादित्य सिंह ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री से मिलकर उठाए हिमाचल के मुद्दे

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vikramaditya singh

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे तेजतर्रार और सक्रिय मंत्रियों में गिने जाने वाले लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने राजधानी दिल्ली में हिमाचल के विकास और अधिकारों की जोरदार आवाज उठाई। नई दिल्ली संसद भवन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में विक्रमादित्य सिंह ने न केवल हिमाचल की चुनौतियों को रखा] बल्कि केंद्र सरकार को दो-टूक शब्दों में यह स्पष्ट कर दिया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस राज्य को विकास के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा मिलना ही चाहिए।

 

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बैठक में विक्रमादित्य सिंह ने साफ कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य को मैदानी राज्यों की तरह नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, दुर्गम पहाड़, भूस्खलन का खतरा और बिखरी हुई आबादी विकास कार्यों को बेहद चुनौतीपूर्ण और महंगा बना देती है। ऐसे में केंद्र सरकार को हिमाचल के लिए योजनाओं और वित्तीय सहायता के मानकों में विशेष लचीलापन देना चाहिए। उन्होंने हिमाचल के अधिकारों की मांग उठाते हुए केंद्र से 'विशेष केंद्रीय सहायता' के रूप में भारी भरकम बजट आवंटित करने का आग्रह किया। 

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अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन पर कड़ा रुख

बैठक के दौरान मंत्री ने अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत प्रदेश के लिए बजट का दायरा बढ़ाने की मांग प्रमुखता से उठाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य प्रदेश के हर छोटे-बड़े नगर में घर-घर नल, आधुनिक जल निकासी व्यवस्था और कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना है। उन्होंने केंद्र को अवगत कराया कि हिमाचल की नदियां और पहाड़ पूरे उत्तर भारत की जीवनरेखा हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा के लिए केंद्र को वित्तीय मानकों में लचीलापन लाते हुए अधिक सहयोग देना होगा।

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हिमाचल के लिए अलग मानदंड बनाने का आग्रह

विक्रमादित्य सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि हिमाचल में पर्यटन लगातार बढ़ रहा है और छोटे-छोटे पहाड़ी नगरों पर जनसंख्या से कई गुना अधिक दबाव पड़ता है। ऐसे में योजनाओं में केवल जनसंख्या के आधार पर बजट तय करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग और व्यावहारिक मानदंड बनाए जाएं, ताकि विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

डिजिटल शासन में हिमाचल का डंका

डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के मुद्दे पर भी विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र के सामने हिमाचल की पहल को रखा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार “एक राज्य-एक पोर्टल” की अवधारणा पर काम कर रही है, जिसके माध्यम से भवन निर्माण अनुमति, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, संपत्ति कर और व्यापार अनुमति जैसी सभी शहरी सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने इसके विस्तार और तकनीकी मजबूती के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहयोग देने का आग्रह किया।

 

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केंद्रीय मंत्री ने दिया आश्वासन

उन्होंने विशेष रूप से जठिया देवी परियोजना और हिम-चंडीगढ़ संपर्क योजना के लिए केंद्र से आर्थिक सहयोग की मांग उठाई। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यदि इन योजनाओं को समय पर मंजूरी और पर्याप्त संसाधन मिलते हैं तो इससे हिमाचल में पर्यटन को नया बल मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने हिमाचल से जुड़े इन मुद्दों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि पर्वतीय राज्य की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।

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