#राजनीति
March 9, 2026
अनुराग शर्मा से छिन सकती है राज्यसभा सीट! करोड़ों की संपत्ति छिपाने की आयोग के पास पहुंची शिकायत
अनुराग शर्मा के चुनाव लड़ने की पात्रता पर भी उठाए सवाल
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शिमला/ धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए अनुराग शर्मा के लिए पद ग्रहण करते ही राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अनुराग शर्मा की नई राजनीतिक पारी की शुरूआत ही विवादों में घिर गई है। राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए कांग्रेस नेता अनुराग शर्मा के लिए आज का दिन खुशी और गम का मिला-जुला मिश्रण साबित हुआ। एक ओर जहां विधानसभा सचिव से उन्हें राज्यसभा सदस्यता का प्रमाण पत्र मिला] वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग की चौखट पर उनके खिलाफ एक ऐसी शिकायत पहुंची है] जो उनकी सांसदी पर तलवार लटका सकती है।
धर्मशाला की प्रखर अधिवक्ता निताशा कटोच ने अनुराग शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए निर्वाचन आयोग] राज्यसभा सचिवालय और रिटर्निंग ऑफिसर को एक विस्तृत शिकायत भेजी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अनुराग शर्मा ने अपनी करोड़ों की संपत्ति और सरकारी ठेकों की जानकारी हलफनामे में छिपाई है।
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धर्मशाला की अधिवक्ता निताशा कटोच ने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग अधिकारी को शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि अनुराग शर्मा को सात मार्च को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया, लेकिन नामांकन के साथ प्रस्तुत किए गए शपथपत्र में उनकी संपत्तियों का पूरा और सही विवरण दर्ज नहीं किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चुनावी हलफनामे में उम्मीदवार को अपनी और अपने परिवार की चल-अचल संपत्तियों का संपूर्ण विवरण देना अनिवार्य होता है। लेकिन उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह दावा किया गया है कि कुछ भूमि संपत्तियों का विवरण नामांकन दस्तावेजों में शामिल नहीं किया गया। इनमें कांगड़ा जिले के बैजनाथ और मुल्थान क्षेत्र के अलावा मंडी जिले के जोगिंदरनगर क्षेत्र में स्थित कुछ भूमि खातों का भी उल्लेख किया गया है।
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दायर शिकायत में यह भी कहा गया है कि संपत्तियों के अलावा एक लाइसेंसी हथियार से संबंधित जानकारी भी नामांकन दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाई गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाना चुनावी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि नामांकन दाखिल करते समय अनुराग शर्मा एक सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहे थे और उनके नाम पर लोक निर्माण विभाग के कई ठेके प्रचलित थे। आरोप है कि इन ठेकों की कुल राशि लगभग सोलह करोड़ रुपये बताई जा रही है और इनमें से कई कार्य अभी भी प्रगति पर हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध हो तो चुनाव लड़ने की पात्रता पर भी प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
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इस पूरे मामले में विधानसभा सचिव द्वारा राज्यसभा सदस्यता का प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि यदि किसी उम्मीदवार से संबंधित ऐसे मुद्दे सामने हों तो पहले उनकी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए थी और उसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था।
अधिवक्ता निताशा कटोच ने अपनी शिकायत में कहा है कि यदि चुनावी हलफनामे में गलत या अपूर्ण जानकारी दी गई है तो यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
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गौरतलब है कि अनुराग शर्मा को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है। सोमवार को उन्हें आधिकारिक रूप से राज्यसभा सदस्यता का प्रमाण पत्र भी सौंपा गया। हालांकि इसी के साथ सामने आई इस शिकायत ने उनकी नई पारी की शुरुआत को राजनीतिक विवादों के घेरे में ला दिया है और अब इस मामले पर आगे की कार्रवाई को लेकर सभी की नजरें संबंधित संस्थाओं पर टिकी हुई हैं।