शिमला। हिमाचल कांग्रेस में संगठन को मजबूत करने की कवायद के बीच किन्नौर में पार्टी का अंदरूनी विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। जिला कांग्रेस कमेटी के गठन और उसमें शामिल किए गए पदाधिकारियों को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं किन्नौर से विधायक जगत सिंह नेगी ने सवाल उठाए हैं। नेगी ने नई कार्यकारिणी में वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे स्थानीय और जमीनी कार्यकर्ताओं को पर्याप्त जगह नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
निगम भंडारी की नियुक्ति से नाराज मंत्री
किन्नौर कांग्रेस में संगठन को लेकर यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले जिला कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर निगम भंडारी की नियुक्ति को लेकर भी नेगी सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। जून में नेगी ने भंडारी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए थे।
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कांग्रेस कमेटियों को भंग कर दिया
बाद में सितंबर की शुरुआत में HPCC ने किन्नौर की जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग कर दिया। हालांकि जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों को उनके पदों पर बनाए रखने की बात सामने आई।
नई कार्यकारिणी में पुराने चेहरों की अनदेखी का आरोप
अब जगत सिंह नेगी ने नई जिला कांग्रेस कमेटी को लेकर अपनी आपत्ति सामने रखी है। उनका कहना है कि किन्नौर में लंबे समय से कांग्रेस के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को संगठन में वह प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिसकी उनसे उम्मीद थी।
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उठाए कई सवाल
नेगी ने आरोप लगाया कि नई 56 सदस्यीय DCC में किन्नौर की पारंपरिक और जमीनी कांग्रेस से जुड़े लोगों को पर्याप्त जगह नहीं दी गई। उन्होंने ऐसे लोगों को संगठन में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया- जिनकी पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे में सक्रिय भूमिका नहीं रही है।
किसी व्यक्ति को नहीं मिली जगह
नेगी ने यहां तक कहा कि नई कार्यकारिणी में किन्नौर की असली कांग्रेस से जुड़े किसी व्यक्ति को जगह नहीं मिली। उन्होंने संगठन में शामिल कुछ लोगों को लेकर ‘स्लीपर सेल’ और ‘जयचंद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। ये आरोप नेगी के हैं और इन पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
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‘पुरानी कार्यकारिणी आखिर थी कहां?’
जगत सिंह नेगी ने संगठन में किए गए बदलाव की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुरानी जिला कांग्रेस कमेटी और उसकी कार्यकारिणी किस तरह काम कर रही थी और उसे बदलने की जरूरत क्यों पड़ी।
स्थानीय कार्यकर्ताओं ने की मेहनत
उनके मुताबिक, किन्नौर में कांग्रेस का संगठन अचानक खड़ा नहीं हुआ है। इसके पीछे वर्षों तक स्थानीय कार्यकर्ताओं की मेहनत रही है। ऐसे में संगठन का पुनर्गठन करते समय उन लोगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने पार्टी के मुश्किल दौर में भी जमीन पर काम किया।
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नहीं ली गई उनकी राय
इससे पहले भी नेगी ने कहा था कि जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के गठन में उनकी राय नहीं ली गई थी। इसी बीच प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कमेटियों में कुछ विसंगतियां होने की बात कही गई थी और नए सिरे से संगठन खड़ा करने की बात सामने आई थी।
‘पैराशूट नेताओं’ को लेकर भी नाराजगी
नेगी ने संगठन में बाहर से आए या अचानक सक्रिय हुए नेताओं को जगह दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ऐसे नेताओं के लिए ‘पैराशूट नेता’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि किन्नौर में कांग्रेस की अपनी मजबूत संगठनात्मक विरासत रही है।
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विवाद ऐसे समय में आया सामने
उनका तर्क है कि दशकों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की जगह ऐसे चेहरों को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए, जो लंबे समय तक संगठन के सक्रिय ढांचे का हिस्सा नहीं रहे। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व किन्नौर में संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठा रहा है। सितंबर की शुरुआत में HPCC ने जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग करने का फैसला लिया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा था कि संगठन में कुछ मुद्दे थे और कमेटियों का पुनर्गठन किया जाएगा।
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ब्लॉक कमेटियों के फैसले पर भी उठे सवाल
जगत सिंह नेगी ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग किए जाने के फैसले पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि ब्लॉक स्तर पर पहले से संगठनात्मक गतिविधियां चल रही थीं। ऐसे में जिला संगठन में बदलाव के साथ ब्लॉक स्तर पर भी पूरी व्यवस्था बदलने की जरूरत क्यों पड़ी, इस पर स्पष्टीकरण होना चाहिए।
कांग्रेस से पुराने जुड़ाव का भी उल्लेख
नेगी ने अपने परिवार के कांग्रेस से पुराने जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता दो बार विधायक रहे और उस दौर में किन्नौर में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया। नेगी के मुताबिक उन्होंने खुद भी कई दशकों तक पार्टी के लिए काम किया है और वर्तमान में किन्नौर से पांचवीं बार विधायक हैं।
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अब नए संगठन पर टिकी नजर
किन्नौर कांग्रेस में चल रहे इस विवाद के बीच अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व नए संगठनात्मक ढांचे को किस तरह तैयार करता है। पार्टी नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि जिला और ब्लॉक स्तर की कमेटियों का पुनर्गठन किया जाएगा और दोनों पक्षों को साथ लेकर संगठन को आगे बढ़ाने का प्रयास होगा।
संगठनात्मक खींचतान को फिर सार्वजनिक
फिलहाल जगत सिंह नेगी के ताजा सवालों ने किन्नौर कांग्रेस के अंदर चल रही संगठनात्मक खींचतान को फिर सार्वजनिक कर दिया है। अब देखना होगा कि नई कमेटियों के गठन में पुराने कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेतृत्व और अलग-अलग धड़ों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।
