#राजनीति
September 10, 2026
कांग्रेस के गढ़ में BJP की बड़ी सेंध- 26 साल बाद शिमला ZP पर कब्जा, निर्दलीय ने बदली गेम
चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा समर्थकों ने मनाया खूब जश्न
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिमला जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन पद के चुनाव में भाजपा ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए करीब 26 साल बाद जिला परिषद की सत्ता अपने नाम कर ली है। लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाले इस जिला परिषद में हुए चुनाव ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए।
अध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिसोदिया ने जीत हासिल की, जबकि वाइस चेयरमैन के पद पर निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा निर्वाचित हुए। क्लांटा ने चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में अपना समर्थन दिया था। इसके बाद भाजपा ने भी उन्हें वाइस चेयरमैन पद के लिए समर्थन दिया, जिससे जिला परिषद में सत्ता का पूरा गणित भाजपा समर्थित खेमे के पक्ष में चला गया।
शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिसोदिया और कांग्रेस समर्थित सुरेंद्र रेटका के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। मतदान के बाद भूपेंद्र सिसोदिया को कुल 13 मत प्राप्त हुए, जबकि सुरेंद्र रेटका के खाते में 10 वोट आए। मतदान के दौरान दो मत निरस्त कर दिए गए।

अध्यक्ष पद पर जीत के लिए 25 सदस्यीय जिला परिषद में कम से कम 13 मतों की आवश्यकता थी। भूपेंद्र सिसोदिया ने ठीक 13 वोट हासिल करते हुए जरूरी बहुमत का आंकड़ा छू लिया और अध्यक्ष पद पर अपनी जीत सुनिश्चित कर ली। उनके निर्वाचन के साथ ही भाजपा समर्थित खेमे ने जिला परिषद की सत्ता पर अपना दावा मजबूत कर दिया।

वाइस चेयरमैन पद के चुनाव में भी मुकाबला रोचक रहा। इस पद पर निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा और मीनाक्षी के बीच मुकाबला हुआ। मतदान में भरत सिंह क्लांटा को 14 वोट हासिल हुए, जबकि मीनाक्षी को 10 मत मिले। एक वोट को निरस्त कर दिया गया।

क्लांटा को मिले 14 मतों ने उन्हें स्पष्ट जीत दिलाई। अध्यक्ष पद के मुकाबले वाइस चेयरमैन के चुनाव में भाजपा समर्थित खेमे की स्थिति और मजबूत नजर आई। क्लांटा के निर्वाचन के साथ ही जिला परिषद में भाजपा समर्थित समूह को दोनों प्रमुख पदों में से दूसरा पद भी मिल गया।
इस पूरे चुनाव में भरत सिंह क्लांटा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। क्लांटा जिला परिषद चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीतकर आए थे। चुनाव से पहले जिला परिषद में किसी भी राजनीतिक दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं था। ऐसे में निर्दलीय सदस्यों के पास सत्ता का समीकरण तय करने की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
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क्लांटा ने अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा का साथ दिया। इसके बाद भाजपा ने उन्हें वाइस चेयरमैन पद के लिए समर्थन दिया। इस राजनीतिक समीकरण ने भाजपा को जिला परिषद में बहुमत हासिल करने में मदद की। इस तरह एक निर्दलीय सदस्य का समर्थन सत्ता परिवर्तन के लिए निर्णायक साबित हुआ।
शिमला जिला परिषद में कुल 25 सदस्य हैं। चुनाव के बाद राजनीतिक दलों की स्थिति ऐसी थी कि किसी भी दल के पास अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं था। भाजपा के साथ 11 सदस्य, जबकि कांग्रेस के पास 10 सदस्य थे। इसके अलावा निर्दलीय सदस्यों की संख्या ने पूरे चुनाव को महत्वपूर्ण बना दिया था।
अध्यक्ष पद पर जीत के लिए 13 मतों की जरूरत थी। ऐसे में भाजपा के 11 सदस्यों के साथ निर्दलीय समर्थन बेहद अहम था। भूपेंद्र सिसोदिया को 13 वोट मिलना इस बात का संकेत रहा कि भाजपा समर्थित खेमे ने आवश्यक संख्या जुटा ली थी। वहीं वाइस चेयरमैन पद पर 14 वोट मिलने से इस खेमे की स्थिति और मजबूत हो गई।
शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और वाइस चेयरमैन पद के चुनाव में देरी को लेकर भी लंबे समय से राजनीतिक चर्चा चल रही थी। जिला परिषद के सदस्यों के चुनाव के बाद भी दोनों महत्वपूर्ण पद खाली थे। आखिरकार चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला परिषद को अपना अध्यक्ष और वाइस चेयरमैन मिल गया।
इस दौरान जिला परिषद में सत्ता को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक खींचतान भी देखने को मिली। चुनाव में देरी को लेकर भाजपा ने प्रशासन और प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए थे। वहीं निर्वाचित सदस्यों की ओर से भी चुनाव प्रक्रिया पूरी करवाने की मांग उठाई गई थी।
अध्यक्ष और वाइस चेयरमैन के चुनाव को लेकर मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था। जिला परिषद के 13 निर्वाचित सदस्यों ने चुनाव प्रक्रिया में देरी को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाया और शिमला के उपायुक्त को निर्धारित समय पर चुनाव करवाने के निर्देश दिए।
इसके बाद 10 सितंबर को जिला परिषद के अध्यक्ष और वाइस चेयरमैन पद के लिए चुनाव करवाया गया। मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिणाम घोषित किए गए। परिणाम सामने आते ही शिमला जिला परिषद में लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक गतिरोध भी समाप्त हो गया।
अध्यक्ष और वाइस चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया इससे पहले भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया था। प्रशासन की ओर से 3 अगस्त को बैठक बुलाई गई थी, लेकिन पर्याप्त संख्या में निर्वाचित सदस्य मौजूद नहीं होने के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका। इसके चलते बैठक को स्थगित करना पड़ा था।
बैठक स्थगित होने के बाद भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला था। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया था कि जिला परिषद के महत्वपूर्ण पदों के चुनाव में अनावश्यक देरी की जा रही है। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत के निर्देश के बाद चुनाव की तारीख निर्धारित हुई।
शिमला जिला परिषद को लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाले राजनीतिक क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में करीब 26 साल बाद भाजपा का जिला परिषद की सत्ता तक पहुंचना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
अध्यक्ष पद पर भूपेंद्र सिसोदिया की जीत और वाइस चेयरमैन पद पर भरत सिंह क्लांटा के निर्वाचन के साथ भाजपा समर्थित खेमे ने जिला परिषद की कमान अपने हाथ में ले ली है। खास बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय हुआ, जब चुनाव के बाद किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था और निर्दलीय सदस्यों के समर्थन की जरूरत थी।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। जिला परिषद परिसर में समर्थकों ने नारेबाजी कर जीत का जश्न मनाया। अध्यक्ष और वाइस चेयरमैन के निर्वाचन के बाद समर्थकों ने दोनों नेताओं को बधाई दी।
इस परिणाम के साथ शिमला जिला परिषद को आखिरकार अपने दोनों प्रमुख पदाधिकारी मिल गए हैं। अब नवनिर्वाचित अध्यक्ष भूपेंद्र सिसोदिया और वाइस चेयरमैन भरत सिंह क्लांटा के सामने जिला परिषद के कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। लंबे समय से खाली चल रहे दोनों पदों पर निर्वाचन के बाद जिला परिषद के विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।