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September 3, 2026

पेंशनरों के बकाये और यूनिवर्सिटी बिल पर सदन में हंगामा, CM सुक्खू और जयराम के बीच तीखी नोकझोंक

जयराम बोले-बहुमत के दम पर कानून बनाना आसान, हाईकोर्ट में टिकाना मुश्किल

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Himachal Pradesh Assembly

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव उस समय खुलकर सामने आ गया, जब सदन में एक तरफ सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित देनदारियों का मुद्दा उठा तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय संशोधन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों ही मुद्दों पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच तीखी बहस देखने को मिली। 

पेंशनरों के बकाये पर सदन में सियासी गर्मी

प्रश्नकाल के दौरान कर्मचारियों और पेंशनरों की वित्तीय देनदारियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी सरकार पेंशनरों को समय पर पेंशन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि सभी पेंशनरों को हर महीने की पहली तारीख को पेंशन दी जा रही है। वहीं, 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों के सभी लाभ जारी किए जा चुके हैं और 58 से 67 वर्ष की आयु के पेंशनरों के बाकी भुगतान भी जल्द निपटाए जाएंगे।

 

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मुख्यमंत्री ने इस दौरान पूर्व भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार सत्ता से बाहर हुई तो कर्मचारियों और पेंशनरों समेत विभिन्न मदों में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां छोड़ी गई थीं। सुक्खू ने कहा कि मौजूदा सरकार इन देनदारियों का भुगतान एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से कर रही है और लगातार वित्तीय स्थिति को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।

जयराम का पलटवार- बकाया चुका दिया तो सड़कों पर क्यों हैं पेंशनर?

मुख्यमंत्री के दावों के बीच नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार को सीधे घेर लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों की सभी देनदारियां चुका दी हैं तो फिर पेंशनरों को धरने और प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। जयराम ठाकुर ने आरडीजी यानी राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे को भी सरकार के सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार केंद्र को वित्तीय संकट के लिए जिम्मेदार ठहराती है, जबकि आरडीजी बंद हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है। 

 

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सीएम बोले- धरना देना अधिकार

विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि धरने पर बैठना हर व्यक्ति का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि वह पेंशनरों और कर्मचारियों के इस अधिकार का सम्मान करते हैं और धरने के माध्यम से अपनी मांगें उठाने वालों की बात भी सुनी जानी चाहिए। हालांकि, मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर इन मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

विश्वविद्यालय संशोधन बिल पर भी भिड़े सुक्खू-जयराम

पेंशनरों के मुद्दे पर शुरू हुई राजनीतिक गर्मी विश्वविद्यालय संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान और बढ़ गई। विपक्ष के विरोध के बीच हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विश्वविद्यालय संशोधन बिल पारित कर दिया गया। बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे सरकार की पारदर्शिता और व्यवस्था परिवर्तन की नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों और वित्तीय मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को केवल कुर्सी की चिंता है, जबकि उनकी सरकार को जनता की सेवा का मोह है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी व्यवस्था का विरोध होगा, इसकी उम्मीद भाजपा से नहीं थी। 

 

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नियुक्तियों में पारदर्शिता का दावा

विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसरों की नियुक्तियों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति की प्रक्रिया विश्वविद्यालयों के माध्यम से होगी, लेकिन चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने डॉक्टरों की भर्ती और चयन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब डॉक्टर टेस्ट के जरिए आते हैं तो उनकी योग्यता पर सवाल नहीं उठते। इसी तरह विश्वविद्यालयों में भी नियुक्तियों को ऐसी प्रक्रिया से जोड़ा जाना चाहिए जिससे योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिले और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की गुंजाइश कम हो।

 

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बेटी टॉप करे तब भी सवाल उठते हैं

मुख्यमंत्री ने चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसी स्थिति बन जाती है कि यदि किसी राजनीतिक व्यक्ति से जुड़े परिवार का कोई बच्चा भी मेरिट में शीर्ष पर आ जाए तो उसकी योग्यता पर भी सवाल उठने लगते हैं। उनका कहना था कि यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और परीक्षा आधारित हो तो किसी भी उम्मीदवार की सफलता पर राजनीतिक संदेह की गुंजाइश कम होगी।

बहुमत के दम पर कानून बनाना आसान, हाईकोर्ट में टिकाना मुश्किल

विश्वविद्यालय संशोधन बिल पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा में बहुमत के आधार पर सरकार किसी भी बिल को पारित कर सकती है, लेकिन असली कसौटी तब होगी जब उस कानून को न्यायिक जांच का सामना करना पड़ेगा। जयराम ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार पहले भी ऐसे कानून लेकर आई है जिन्हें बाद में हाईकोर्ट से झटका लगा।

 

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उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल बहुमत के आधार पर कानून पारित करने की जगह है, बल्कि यहां ऐसे कानून बनने चाहिए जो संवैधानिक और कानूनी कसौटियों पर भी खरे उतरें। जयराम ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय संशोधन कानून को लेकर यूजीसी के नियमों के आधार पर कोई व्यक्ति हाईकोर्ट का रुख करता है और अदालत से कानून रद्द होता है तो इसका असर केवल सरकार पर नहीं पड़ेगा, बल्कि विधानसभा की गरिमा पर भी सवाल खड़े होंगे।

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