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September 4, 2026

हिमाचल में मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती शुरू! दिल्ली रवाना हुए CM सुक्खू, सुंदर ठाकुर भी पहुंचे

मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें भी हुई तेज, किसकी जाएगी कुर्सी बड़ा सवाल

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Himachal Pradesh Cabinet Expansion

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में लंबे समय से खाली चल रहे कैबिनेट मंत्री के पद को लेकर अब सियासी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का अचानक दिल्ली रवाना होना और मंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे कुल्लू विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का भी दिल्ली पहुंचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का समय अब नजदीक आ गया है और दिल्ली में इस पर निर्णायक मंथन हो सकता है।

सीएम सुक्खू अचानक दिल्ली हुए रवाना

मुख्यमंत्री सुक्खू गुरुवार को विधानसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही के दौरान ही दिल्ली जाने की जानकारी सदन में दे चुके थे। उन्होंने बताया कि उन्हें एक आवश्यक कार्य के सिलसिले में दिल्ली जाना है और शाम चार बजे एक बैठक निर्धारित है। इसके बाद दोपहर में मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। मुख्यमंत्री के इस अचानक दिल्ली दौरे को सामान्य सरकारी बैठक से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

 

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दिल्ली में बढ़ी सियासी हलचल

मुख्यमंत्री सुक्खू के दिल्ली पहुंचने के समय को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार का मामला लंबे समय से कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर चर्चा में है। अब मानसून सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री इस विषय पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत कर सकते हैं।

 

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राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में सिर्फ एक नए चेहरे को शामिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि मंत्रियों के कामकाज और विभागीय प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर विभागों में फेरबदल भी करना चाहते हैं। ऐसे में दिल्ली दौरा केवल नए मंत्री के नाम पर चर्चा तक सीमित रहने के बजाय मौजूदा मंत्रियों के विभागों में संभावित बदलाव के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

सुंदर ठाकुर का नाम सबसे आगे, लेकिन पेच अभी बाकी

कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम काफी समय से मंत्रिमंडल विस्तार के लिए प्रमुखता से सामने आता रहा है। मंडी संसदीय क्षेत्र को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिहाज से भी उनके नाम को मजबूत माना जाता है। सुंदर ठाकुर का दिल्ली पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा दिलचस्प बना रहा है। हालांकि कांग्रेस के भीतर मंत्रिमंडल की मौजूदा सामाजिक और क्षेत्रीय संरचना को देखते हुए अंतिम फैसला इतना आसान नहीं माना जा रहा।

 

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पार्टी के भीतर यह सवाल भी है कि यदि सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाया जाता है तो क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर इसका क्या असर पड़ेगा। इसी कारण ज्वालामुखी के विधायक संजय रतन और पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल के नाम भी संभावित विकल्पों के तौर पर चर्चा में रहे हैं। ऐसे में दिल्ली में होने वाली बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुख्यमंत्री की पसंद किस नाम पर टिकती है और हाईकमान किस चेहरे पर अपनी मुहर लगाता है।

विभागों में भी हो सकता है बड़ा फेरबदल

सुक्खू सरकार के लिए इस बार मंत्रिमंडल विस्तार का मतलब सिर्फ खाली कुर्सी भरना नहीं माना जा रहा। सरकार के कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री पहले भी विभागीय प्रदर्शन पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में मंत्रियों के विभागों का मूल्यांकन कर जिम्मेदारियों में बदलाव किए जाने की संभावना भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा है। यदि विभागों में फेरबदल होता है तो इसका सीधा असर सरकार की कार्यशैली और आने वाले चुनावी एजेंडे पर पड़ सकता है।

 

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मुख्यमंत्री उन विभागों में बदलाव कर सकते हैं जहां सरकार अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाई है, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस लिहाज से संभावित विस्तार को सुक्खू सरकार के दूसरे चरण के राजनीतिक और प्रशासनिक पुनर्गठन के तौर पर भी देखा जा रहा है।

डिप्टी स्पीकर और चीफ व्हिप का मामला भी इसी से जुड़ा

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर निर्णय में देरी का असर विधानसभा के दूसरे महत्वपूर्ण पदों पर भी दिखाई दिया है। मानसून सत्र के दौरान डिप्टी स्पीकर का चयन नहीं हो पाया। इसके अलावा चीफ व्हिप के पद पर भी नियुक्ति होनी बाकी है। कांग्रेस के भीतर इन पदों को लेकर भी अलग-अलग नामों पर चर्चा होती रही है। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलती है, इसका असर इन नियुक्तियों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि पार्टी एक साथ कई समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है।

 

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अगले साल चुनावी साल, इसलिए जल्द फैसले की तैयारी

हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए आने वाला समय राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। अगले साल चुनावी गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। ऐसे में सरकार के सामने मंत्रिमंडल में खाली पद, संगठनात्मक नियुक्तियां और विधानसभा से जुड़े महत्वपूर्ण पदों को समय रहते भरने की चुनौती है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने क्षेत्रीय संतुलन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावी रणनीति—तीनों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की जरूरत होगी। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला लगातार टलता रहा है।

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