शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस अब भी अपने उम्मीदवार को लेकर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने में महज दो दिन शेष हैं, ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा।

 

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में दिल्ली पहुंचकर पार्टी हाईकमान के साथ लंबी रणनीतिक बैठक की। देर रात तक चली इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ राज्यसभा सीट को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

नामांकन से पहले रणनीतिक सस्पेंस

बताया जा रहा है कि हिमाचल कांग्रेस जानबूझकर उम्मीदवार के नाम पर सस्पेंस बनाए रखना चाहती है। पार्टी नेतृत्व इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि नामांकन के अंतिम दिन ही प्रत्याशी की घोषणा की जाए, ताकि विपक्षी दल को रणनीति बनाने का मौका न मिले। राज्य के अधिकांश कांग्रेस विधायक चाहते हैं कि राज्यसभा के लिए किसी स्थानीय यानी हिमाचली चेहरे को मौका दिया जाए। वहीं, पार्टी हाईकमान राष्ट्रीय स्तर के नेता को हिमाचल से राज्यसभा भेजने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। यही कारण है कि अंतिम फैसला अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

 

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दावेदारों की लंबी सूची

राज्यसभा सीट के लिए कई बड़े नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल, आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल  और एडवोकेट जनरल अनूप रतन के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। इसके अलावा गैर-हिमाचली चेहरों में रजनी पाटिल और पवन खेड़ां के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल हैं।

भाजपा भी मौके की तलाश में

राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो विधानसभा में बहुमत कांग्रेस के पास जरूर है, लेकिन भाजपा स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। सूत्रों का कहना है कि यदि कांग्रेस गैर-हिमाचली उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा भी चुनाव मैदान में प्रत्याशी उतार सकती है। भाजपा खेमे में मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी को दोबारा मौका देने सहित कई नामों पर मंथन चल रहा है। गौरतलब है कि उनका कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, जिसके चलते यह चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

 

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पिछले चुनाव से सबक

फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी संख्याबल कम होने के बावजूद भाजपा ने रणनीतिक चाल चलते हुए जीत हासिल की थी। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और हर कदम बेहद सावधानी से उठा रही है।

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16 मार्च को मतदान

निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि 16 मार्च को मतदान होना है। ऐसे में आने वाले 48 घंटे हिमाचल की राजनीति की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। फिलहाल इतना तय है कि हिमाचल कांग्रेस उम्मीदवार के नाम को लेकर आखिरी क्षण तक सस्पेंस बनाए रखकर राजनीतिक बढ़त हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। अब सभी की निगाहें नामांकन के दिन पर टिकी हैं, जब पार्टी अपने असली पत्ते खोल सकती है।

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