शिमला। “जिन्हें कलम की ताकत और कानून का इल्म होता है, उन्हें चिल्लाकर अपमान करने की कभी आवश्यकता नहीं होती...” हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की यह टिप्पणी इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत के अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाने के कुछ ही दिन बाद विक्रमादित्य सिंह ने बिना नाम लिए ऐसा तंज कसा है, जिसे सीधे तौर पर कंगना के तेवरों से जोड़कर देखा जा रहा है। मंत्री की इस पोस्ट के बाद मंडी की राजनीति में दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
कंगना के तेवरों पर विक्रमादित्य का निशाना
विक्रमादित्य सिंह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्टर साझा किया। इसमें किसी नेता का नाम नहीं लिया गया, लेकिन पोस्टर में लिखे शब्द हाल ही में मंडी में हुई दिशा कमेटी की बैठक में कंगना रनौत के व्यवहार से जोड़कर देखे जा रहे हैं। पोस्टर में कहा गया कि कानून और कलम की ताकत रखने वाले व्यक्ति को अपनी बात मनवाने के लिए आवाज ऊंची करने की जरूरत नहीं होती।
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आवाज ऊंची करने से आदेश सख्त नहीं बनते
विक्रमादित्य सिंह की साझा की गई पोस्ट का सबसे चर्चित हिस्सा यही है कि आवाज ऊंची करने से आदेश सख्त नहीं बनते, बल्कि कलम की ताकत और कानून की समझ से लिए गए फैसले ज्यादा प्रभावी होते हैं। ऐसे में मंत्री की इस टिप्पणी को प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
दिशा बैठक में अधिकारियों पर सख्त दिखी थीं कंगना
दरअसल, कुछ दिन पहले मंडी में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक के दौरान सांसद कंगना रनौत अधिकारियों से सख्त अंदाज में सवाल करती नजर आई थीं। विकास कार्यों में देरी और सांसद निधि से जुड़े कामों को लेकर उन्होंने अधिकारियों से जवाब मांगा था। बैठक के दौरान उनका अधिकारियों को फटकार लगाने वाला अंदाज कैमरों में भी कैद हुआ, जिसके बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
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वायरल वीडियो के बाद छिड़ी बहस
कंगना के इस अंदाज को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक पक्ष ने इसे सांसद के तौर पर अधिकारियों से जवाब मांगने और विकास कार्यों की निगरानी का उनका अधिकार बताया। वहीं, दूसरे पक्ष ने अधिकारियों से बातचीत के तरीके पर सवाल उठाते हुए इसे सार्वजनिक रूप से फटकार लगाने का अंदाज बताया।
अब विक्रमादित्य ने साधा निशाना
इसी विवाद के बीच विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट सामने आई है। उन्होंने सीधे तौर पर कंगना का नाम नहीं लिया, लेकिन पोस्टर में “चिल्लाकर अपमान”, “कलम की ताकत” और “कानून का इल्म” जैसी बातों का जिक्र किया। राजनीतिक तौर पर इसे कंगना के हालिया तेवरों पर विक्रमादित्य सिंह का अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
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मंडी की सियासत में फिर आमने-सामने दो चेहरे
विक्रमादित्य सिंह और कंगना रनौत की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नई नहीं है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों मंडी सीट से आमने-सामने थे। उस चुनाव में कंगना रनौत ने विक्रमादित्य सिंह को हराकर लोकसभा का चुनाव जीता था। चुनाव के बाद भी दोनों नेता अलग-अलग मौकों पर एक-दूसरे पर राजनीतिक निशाना साधते रहे हैं।
चुनावी मुकाबले के बाद भी जारी है जुबानी जंग
मंडी लोकसभा सीट हिमाचल की सबसे चर्चित राजनीतिक सीटों में रही है। चुनाव में आमने-सामने आने के बाद अब जब दोनों नेता अलग-अलग राजनीतिक भूमिकाओं में हैं, तो उनके बीच होने वाली अप्रत्यक्ष बयानबाजी भी प्रदेश की राजनीति में सुर्खियां बन जाती है। कंगना जहां केंद्र में भाजपा सांसद के तौर पर मंडी के विकास कार्यों को लेकर सक्रियता दिखा रही हैं, वहीं विक्रमादित्य सिंह प्रदेश की सुक्खू सरकार में मंत्री हैं।
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सुक्खू सरकार के 'तेजतर्रार' मंत्री का अलग अंदाज
विक्रमादित्य सिंह को हिमाचल की राजनीति में मुखर और बेबाक नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में उनका किसी मुद्दे पर सीधे नाम लेने के बजाय पोस्टर या सोशल मीडिया संदेश के जरिए राजनीतिक कटाक्ष करना भी चर्चा का विषय बन गया है। इस बार भी उन्होंने कंगना का नाम लिए बिना उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े करने की कोशिश की है।
अब कंगना के जवाब पर नजर
विक्रमादित्य सिंह की इस पोस्ट के बाद अब राजनीतिक नजरें कंगना रनौत की प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं। क्या कंगना इस तंज का जवाब देंगी या इसे नजरअंदाज करते हुए विकास के मुद्दों पर ही फोकस रखेंगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल एक बात साफ है कि दिशा कमेटी की बैठक में कंगना के अधिकारियों को फटकारने का मामला अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है और विक्रमादित्य सिंह की एक पोस्ट ने मंडी की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
