#राजनीति
August 27, 2026
लॉटरी को लेकर हिमाचल में सियासी घमासान : सांसद अनुराग ने CM को लिखा पत्र- कह दी ये बात
100 करोड़ की कमाई से नहीं बदलेगी आर्थिक तस्वीर: अनुराग
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी दोबारा शुरू करने की तैयारी के बीच सियासी विरोध तेज हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर लॉटरी शुरू करने के लिए जारी टेंडर को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
उन्होंने खास तौर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी के लिए सोल सेलिंग एजेंट नियुक्त करने संबंधी ई-टेंडर का हवाला देते हुए सरकार से इस पूरी प्रक्रिया को रोकने की अपील की है।
अनुराग ठाकुर का कहना है कि हिमाचल में लॉटरी पर लंबे समय से प्रतिबंध रहा है और इसे दोबारा शुरू करने का फैसला सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर गंभीर असर डाल सकता है।
अनुराग ठाकुर ने अपने पत्र में हिमाचल में लॉटरी के पुराने इतिहास का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने वर्ष 1999 में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद वर्ष 2007 में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान लॉटरी दोबारा शुरू हुई, लेकिन बाद में उस पर फिर रोक लगा दी गई।
उन्होंने कहा कि प्रेम कुमार धूमल, वीरभद्र सिंह और जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकारों ने आर्थिक दबाव के बावजूद लॉटरी को लेकर प्रतिबंध की नीति बनाए रखी।
अनुराग ठाकुर ने प्रस्तावित ऑनलाइन लॉटरी व्यवस्था को लेकर विशेष चिंता जताई है। उनके मुताबिक प्रस्ताव में हर दिन 12 ड्रॉ और साल में तीन बंपर ड्रॉ का प्रावधान बताया गया है।
उनका तर्क है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद लॉटरी केवल दुकानों या एजेंटों तक सीमित नहीं रहेगी- बल्कि मोबाइल फोन के जरिए लोगों के घर तक पहुंच सकती है। इससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक असर पड़ने की आशंका उन्होंने जताई है। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल में पहले भी ऐसे परिवार रहे हैं जिन्होंने लॉटरी के चक्कर में अपनी कमाई, बचत और पेंशन तक गंवाई और आर्थिक परेशानियों में फंस गए।
अनुराग ठाकुर ने लॉटरी से होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि हिमाचल पर कर्ज का बोझ करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और कर्ज-GSDP अनुपात 42 प्रतिशत से ज्यादा बताया गया है।ऐसे में उनका कहना है कि लॉटरी से अनुमानित करीब 100 करोड़ रुपये सालाना आय राज्य के बड़े वित्तीय संकट का स्थायी समाधान नहीं हो सकती।
उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि लॉटरी की कुल बिक्री बड़ी होने के बावजूद पुरस्कार राशि, एजेंट कमीशन, प्रचार और प्रशासनिक खर्च जैसी मदों को निकालने के बाद सरकार के पास बचने वाला वास्तविक राजस्व काफी कम हो सकता है।