शिमला। हिमाचल कांग्रेस में सुलग रही नाराजगी अब खुली बगावत में बदलती नजर आ रही है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से नीरज भारती के इस्तीफे ने न केवल संगठन के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच बढ़ती दूरी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नीरज भारती पिछले कल से लगातार सुक्खू सरकार और उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल दागे जा रहे हैं और जिस तरह से वे सरकार पर आरोप लगा रहे हैं, उससे राजनीति में नया भूचाल आ गया है।

महीने में लेते हैं 5 अटैची

खास बात यह भी है कि नीरज भारती का राजनीतिक परिवार कांग्रेस में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है और उनके पिता चंद्र कुमार वर्तमान सुक्खू सरकार में मंत्री हैं। लेकिन उसके बावजूद भी नीरज भारती ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक पोस्ट दागे हैं। इन में से एक पोस्ट में उनका कहना है कि - महीने के 5 अटैची इक्कठे होते हैं, 2 खुद रखे जाते हैं 3 दिल्ली भेजे जाते हैं। जिसके बाद सोशल मीडिया में लोग इसके की मायने निकाल रहे हैं। 

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सरकार पर सीधे आरोप

इस्तीफे के बाद किए गए अपने पोस्टों में नीरज भारती ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि तीन साल के कार्यकाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहे हैं। उन्होंने यहां तक दावा कर दिया कि यदि हालात नहीं बदले तो अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बेहद नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनके बयानों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

अफसरों को काम करने से रोकते हैं 

 अपनी एक पोस्ट में नीरज भारती लिखते हैं कि मंत्री डीओ साइन करके ले जाते हैं या मुख्यमंत्री को भेज देते हैं, मुख्यमंत्री मंत्रियों के सामने अप्रूव भी कर देते - लेकिन बाद में अफसरों को बोल दिया जाता है कि कुछ नहीं करना। यही नहीं, एक नई पोस्ट में भारती ने अधिकारियों पर भी हमला बोला है - उनका कहना है कि कई अफसर और अधिकारी लोगों को धमकाते हैं और मंत्री के पास जाने का कारण पूछते हैं।  

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अब तक की है ये सभी पोस्ट

  • कुछ बड़े अधिकारी भी अपने आपको सर्वेसर्वा समझ बैठे हैं..... अगर कोई किसी काम के लिए सीधे मंत्री के पास चला जाए..... तो इन्हें दिक्कत हो जाती है..... फिर सवाल शुरू हो जाते हैं कि सीधे मंत्री के पास क्यों गए..... और कई बार डराने-धमकाने की कोशिश भी शुरू हो जाती है..... याद रखो..... अगर मैंने तुम्हारे धागे खोलना शुरू कर दिए..... तो नंगे होते देर नहीं लगेगी..... इसलिए जितना अधिकार मिला है..... उतने में ही रहो..... क्योंकि हर चीज का हिसाब वक्त आने पर सामने आ ही जाता है.....
  • कुछ लोग बोल रहे हैं कि सोशल मीडिया पर क्यों लिख रहे हो..... जनाब..... जब अंदर का सिस्टम ही सुनने को तैयार न हो..... बार-बार बात रखने के बाद भी कोई असर न हो..... तो फिर अपनी बात कहां रखे..... जब अंदर सुनवाई बंद हो जाए..... तो सोशल मीडिया ही आखिरी रास्ता बचता है..... इसलिए फिर यहीं लिखा जाएगा....

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  • हालात ऐसे हो गए हैं..... कि कार्यकर्ताओं, आम लोगों और यार दोस्तों तक के फोन उठाने से भी डर लगता है..... पता नहीं अब कौन सा काम बता देंगे..... और फिर क्या जवाब दूंगा..... “हो जाएगा” बोलूं..... “देखता हूं” कहूं..... या साफ कह दूं “नहीं होगा”..... क्योंकि आगे से क्या जवाब आएगा..... काम होगा भी या नहीं..... इसका खुद ही कोई भरोसा नहीं होता..... एक समय 2012 से 2017 का भी था..... अगर किसी को एक बार बोल दिया कि “हो जाएगा”..... तो कोशिश रहती थी कि उसी दिन या अगले दिन काम करवाकर खुद फोन करके बता दें कि काम हो गया है..... अब तो ऐसा “व्यवस्था परिवर्तन” हुआ है..... कि लोगों को जवाब देने से पहले भी दस बार सोचना पड़ता है..... क्योंकि भरोसा ही नहीं रहता कि आगे से क्या होना है...

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कब होती हैं ट्रांसफरें?

ट्रांसफरें कब शुरू होती हैं.. कब बंद हो जाती हैं..... इसका ही पता नहीं चलता..... ऊपर से जो डीओ भेजे होते हैं..... उनका भी कोई अता-पता नहीं चलता..... पता नहीं किस बंद ट्रंक में पहुंच जाते हैं..... या फिर रास्ते में ही गुम हो जाते हैं....

पैसा नहीं है, पैसा नहीं है...

पैसा नहीं है..... पैसा नहीं है..... का रोना तो ठीक है..... लेकिन कम से कम वो काम तो हो जाने चाहिए थे..... जिनमें पैसे की कोई इन्वॉल्वमेंट ही नहीं थी..... कई काम ऐसे होते हैं..... जिनमें सिर्फ नीयत..... इच्छा शक्ति..... और फैसला लेने की जरूरत होती है..... लेकिन जब वो भी न हों..... तो फिर हर चीज का ठीकरा सिर्फ “पैसा नहीं है” पर फोड़ना भी ठीक नहीं लगता...

बार-बार करवाया एहसास

वक्त-वक्त पर सरकार और सुक्खू जी को चेताने की कोशिश की..... बार-बार यह एहसास करवाने की कोशिश की कि कार्यकर्ताओं..... आम लोगों और नेताओं की बात सुनना जरूरी है..... लेकिन शायद बात को गंभीरता से नहीं लिया गया..... अब पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में अपनी कारगुजारियों की झलक दिखनी शुरू हो गई है..... ऊपर से जबरदस्ती जीत का श्रेय लेने की कोशिश जरूर हो रही है..... लेकिन जमीन की सच्चाई क्या है..... ये कार्यकर्ता..... नेता और जनता सब जानते हैं..... खैर..... राजनीति में हर चीज की एक किश्त होती है..... अगली किश्त 2027 में भी मिल जाएगी....
 

CM सुक्खू से नहीं कोई व्यक्तिगत दुश्मनी

मेरी कोई सुक्खू जी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी..... कि मैं सिर्फ उनके खिलाफ रहने के लिए बोलूं..... बल्कि सच तो यह है कि जब वो मुख्यमंत्री नहीं थे..... तब भी उनकी चर्चा होती थी तो मैं हमेशा यही कहता था कि संघर्षशील हैं..... अपनी बात पर स्टैंड रखने वाले नेता हैं.....
उस समय आदरणीय एवं स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह जी के कान जो लोग सुक्खू जी के खिलाफ भरते थे..... आज वही लोग सुक्खू जी के खास बने हुए हैं..... मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं कि कौन खास है और कौन नहीं..... राजनीति में यह सब चलता रहता है.....
दिक्कत सिर्फ इस बात से है कि पिछले 3 सालों में कार्यकर्ताओं..... आम लोगों और पार्टी के नेताओं को काम के नाम पर सिर्फ उम्मीदें और आश्वासन ही ज्यादा मिले हैं..... जबकि तवज्जो कुछ खास मित्रगणों और उन लोगों को ज्यादा मिली..... जो कभी इधर..... कभी उधर रहे.....
अगर सरकार बनने के बाद शुरू से सही तरीके से काम हुआ होता..... कार्यकर्ताओं की सुनवाई होती..... जनता के काम होते..... तो मैं कोई बेवकूफ नहीं हूं जो अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ बोलूं.....
जब राहुल गांधी जी की पदयात्रा हिमाचल प्रदेश पहुंची थी..... नई सरकार बनी ही थी..... तब सुक्खू जी के कहने पर मैं अपने ज्वाली विधानसभा क्षेत्र से 2000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को लेकर सुबह लगभग 3 बजे निकला था..... और पंजाब-हिमाचल बॉर्डर मीरथल में सुबह लगभग 6 बजे राहुल गांधी जी का स्वागत किया था.....
वो कार्यकर्ता बेवकूफ नहीं होते..... जो हर परिस्थिति में पार्टी के साथ खड़े रहते हैं..... लेकिन दुख तब होता है..... जब सरकार बनने के बाद वही लोग खुद को हाशिए पर महसूस करने लगें...

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चाहता तो चुप रह सकता था...

चाहता तो चुप रहकर सत्ता का आनंद लेता..... आराम से सिस्टम का हिस्सा बनकर अपने काम निकालता..... और पैसे भी कमा लेता..... लेकिन आखिर में शक्ल उन्हीं कार्यकर्ताओं और लोगों को दिखानी है..... जिनकी मेहनत..... भरोसे और संघर्ष की वजह से सत्ता तक पहुंचे हैं..... पैसा कमाना बड़ी बात नहीं है..... जमीर बचा रहना बड़ी बात है..... क्योंकि कुर्सी और सत्ता हमेशा नहीं रहती..... लेकिन लोग याद रखते हैं कि मुश्किल समय में कौन उनके साथ खड़ा रहा..... और किसने सिर्फ अपना फायदा देखा..... पैसा कमाएं या न कमाएं..... लेकिन जमीर जिंदा रहना चाहिए....

दफ्तर में रखा है स्पेशल ट्रंक

2017 से 2022 वाली भाजपा की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सरकार में भाजपा विधायकों की आज की कांग्रेस सरकार के उप मुख्यमंत्री और मंत्रियों से कहीं ज्यादा पावर थी..... विधायक सुबह मुख्यमंत्री के पास जाते थे..... और शाम तक अपना काम करवाकर वापस आ जाते थे..... आज हाल ये है कि मंत्री डीओ साइन करके ले जाते हैं..... या मुख्यमंत्री को भेज देते हैं..... मुख्यमंत्री मंत्रियों के सामने अप्रूव भी कर देते हैं..... लेकिन बाद में अफसरों को बोल दिया जाता है कि कुछ नहीं करना..... एक स्पेशल ट्रंक रखा हुआ है दफ्तर में..... जिसमें फाइलें डाल दी जाती हैं..... और फिर वहां से वही फाइलें बाहर निकलती हैं..... जो 2-3 खास मित्रगणों की होती हैं..... बाकी फाइलें पता नहीं किस कोने में गुम हो जाती हैं....

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तलवे चाटने वाले चमचे लिख रहे...

कुछ तलवे चाटने वाले चमचे लिख रहे हैं कि नीरज भारती की भी कीमत लग गई होगी..... तो सुनो तलवेचाटुओं..... नीरज भारती न कभी बिकने वालों में से रहा है..... और न ही किसी की औकात है कि उसे खरीद सके..... लेकिन फिर भी मान लो अगर कभी नीरज भारती की कीमत लग भी गई..... तो तुम दो कौड़ी की चमचागिरी और तलवे चाटने वालों से बहुत ज्यादा ही होगी..... क्योंकि रीढ़ की हड्डी वाले लोग बिकते नहीं..... अपने फैसले खुद लेते हैं....

नेताओं का काटा जाएं एंट्री टैक्स

दिल्ली या अन्य राज्यों से आने वाले बड़े-बड़े नेताओं का भी हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वार पर एंट्री टैक्स काटा जाए..... आखिर वो भी तो प्रदेश में बाहर से ही आ रहे हैं..... या नियम और टैक्स सिर्फ आम जनता के लिए ही होते हैं.....

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कभी अपने घर की तरफ देख लो

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के सम्माननीय कार्यकर्ताओं..... मोदी और भाजपा को बाद में कोसना..... पहले 2022 में आप लोगों ने इतनी मेहनत..... संघर्ष और लड़ाई लड़कर जो अपनी कांग्रेस सरकार बनाई थी..... उसका रिपोर्ट कार्ड भी ले लो..... मोदी को तो 2014 से कोस ही रहे हो..... लेकिन कभी अपने घर की तरफ भी देख लो..... अपने वालों का भी पता करो कि कितने पानी में हैं..... जनता के बीच सरकार की क्या स्थिति है..... कार्यकर्ताओं की कितनी सुनवाई हो रही है..... और सरकार का जमीन पर कितना असर दिखाई दे रहा है..... जिन कार्यकर्ताओं ने मुश्किल समय में पार्टी का झंडा उठाए रखा..... गांव-गांव जाकर कांग्रेस के लिए माहौल बनाया..... विरोध झेला..... अपनी मेहनत, समय और सम्मान दांव पर लगाया..... आज अगर वही कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित और निराश महसूस करें..... तो ये चिंता की बात है..... जहां कांग्रेस की सरकार है..... पहले वहां तो हालात संभाल लो..... क्योंकि सिर्फ चुनावों में बड़ी-बड़ी गारंटियां देकर सरकार बना लेना ही सब कुछ नहीं होता..... असली काम उसके बाद शुरू होता है..... जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में..... अपने वादों को निभाने में..... और उन कार्यकर्ताओं को सम्मान देने में..... जिन्होंने सत्ता तक पहुंचाने के लिए संघर्ष किया..... देश में और राज्यों में कांग्रेस सरकार के सपने बाद में देख लेना..... पहले वहां का हिसाब भी ले लो..... जहां सरकार पहले से है..... क्योंकि जनता अब भाषणों से नहीं..... जमीन पर काम और नतीजों से फैसला करती है...

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364 दिन लग्जरी लाइफस्टाइल

हमारे प्रदेश के शायद पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं..... जो साल के 364 दिन टोयोटा फॉरच्यूनर, फोर्ड एंडेवर, हुंडई की इलेक्ट्रिक कार, दूसरी लग्ज़री गाड़ियों और हेलिकॉप्टर में घूमते हैं..... लेकिन साल में एक दिन बजट पेश करने के लिए अपनी निजी मारुति आल्टो में आते हैं..... वो भी आगे पीछे पुलिस की लग्ज़री गाड़ियों का काफिला लगाकर..... और हाथ में अटैची ऐसे पकड़ते हैं..... जैसे इन जनाब से ऊपर का कोई फाइनेंस का जानकार है ही नहीं..... लेकिन इतने दिखावे के बाद भी अगर जनता को नतीजे महसूस न हों..... तो फिर रिजल्ट जीरो ही माना जाएगा....

तुम्हारे चाटुकार बन तुम्हारे जूते चाटे

तुमको भाजपा से लड़ने वाले नहीं चाहिए..... तुम्हे चाहिए जो तुम्हारे चाटुकार बनकर तुम्हारे जूते चाटे..... बाथरूम के दरवाजे के बाहर तुम्हारे लिए तौलिया पकड़ कर खड़े रहने वाले चाहिए..... अगर खैनी खाई है तो अपने हाथ आगे कर दे तुम्हारे थूकने के लिए..... ऐसे चाटुकार चाहिए तुमको.....

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भाड़ में गया ऐसा अनुशासन

अनुशासन..... अनुशासन..... भाड़ में गया ऐसा अनुशासन..... जहां अपने समर्पित कार्यकर्ताओं की ही बात न सुनी जाए..... उनकी मेहनत..... संघर्ष..... और भावनाओं की कोई कद्र न हो....

पेमेंट की चल रही बंदरबांट

ठेकेदारों की पेमेंट ऐसे हो रही है..... मानो किसी की 25 लाख की पेमेंट फंसी पड़ी हो..... तो शिमला जाओ..... 2–3 लाख दो..... थोड़ी देर के लिए ट्रेजरी खुलेगी..... और जब तक आप वापस घर पहुंचोगे..... आपकी पेमेंट रिलीज हो चुकी होगी..... और ये जो गुर्राही करके बंदरबाट चल रही है..... उसका भी पता है मुझे..... कौन-कौन लोग शामिल हैं..... कौन क्या कर रहा है..... सब जानकारी है..... ये कोई हवा-हवाई बात नहीं है..... हमीरपुर के ही एक ठेकेदार भाई ने खुद ये बात बताई थी....

दिल्ली में आपके भी हाल ऐसे हैं क्या...

एक बार मेरी और दो अन्य विधायकों की मुलाकात सुक्खू जी से हुई थी..... कुल मिला कर 2–3 बार ही मुलाकात हुई होगी मेरी सुक्खू जी से..... वहां चर्चा चल पड़ी कि पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष किसे बनाया जा रहा है..... दो और विधायक भी बैठे थे..... (नाम नहीं लेना चाहूंगा)..... तब सुक्खू जी का जवाब था ‘हाईकमान जिस मर्जी को बना दे प्रदेश अध्यक्ष..... मुख्यमंत्री से बड़ा थोड़े न होगा’..... अब अगर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर सोच ऐसी हो..... तो फिर संगठन की हालत कैसी होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है..... मल्लिकार्जुन खड़गे जी..... दिल्ली में आपके भी हाल ऐसे ही हैं क्या....

सुक्खू जी के इशारे में नाचना होगा

पार्टी का पदाधिकारी भी भाई मुकेश अग्निहोत्री जी और विनय कुमार जी की बात पर बना था लेकिन जब बना तो पता चला कि सुक्खू जी के इशारों पर नाचना होगा.....

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