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June 4, 2026
कूड़ा नहीं बनेगा बोझ! हिमाचल में प्लास्टिक के कचरे से बनेंगी सड़कें- सरकार ने जारी किए नए नियम
लचीले प्लास्टिक कचरे का किया जाएगा उपयोग
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों में प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP जारी कर दी है, जिसके तहत प्लास्टिक अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित कर सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक पूरी तरह साफ और निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। प्लास्टिक कचरे में धूल, मिट्टी या अन्य अशुद्धियों की मात्रा एक प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
इसके अलावा शहरी निकायों को प्लास्टिक को साफ करने के बाद उसे निर्धारित आकार में श्रेड यानी छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलना होगा। तय मानक से बड़े प्लास्टिक के टुकड़ों का उपयोग सड़क निर्माण में नहीं किया जाएगा।
सरकार ने इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग, शहरी निकायों, पर्यावरण विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच समन्वित व्यवस्था तैयार की है। हर वित्तीय वर्ष में लोक निर्माण विभाग संबंधित नगर निकायों को यह जानकारी देगा कि सड़क निर्माण के लिए कितनी मात्रा में प्लास्टिक कचरे की आवश्यकता होगी।
इसके बाद विभागीय अधिकारी स्थानीय निकायों को प्लास्टिक की पहचान, छंटाई और सुरक्षित संग्रहण का प्रशिक्षण भी देंगे। एसओपी के अनुसार केवल लचीले प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया जाएगा। इसमें कैरी बैग, प्लास्टिक बोरे, दूध की थैलियां, डिटर्जेंट और कॉस्मेटिक उत्पादों की प्लास्टिक पैकेजिंग शामिल है। वहीं कठोर प्लास्टिक और काले रंग की प्लास्टिक फिल्म के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
सरकार ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड रखने का भी प्रावधान किया है। प्लास्टिक कचरे की मात्रा, गुणवत्ता और उसके उपयोग का पूरा डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जाएगी।
सड़क निर्माण के दौरान बिटुमिन मिश्रण में उसके कुल भार का लगभग 8 प्रतिशत प्लास्टिक कचरा मिलाया जाएगा। यह प्रक्रिया भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के निर्धारित मानकों के अनुरूप होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ-साथ पर्यावरणीय लाभ भी मिलेगा।
सरकार ने सभी कार्यकारी अभियंताओं को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें यह बताया जाएगा कि कितनी मात्रा में प्लास्टिक कचरा प्राप्त हुआ और उससे कितनी सड़कें बनाई गईं। इसके साथ ही पर्यावरण सुरक्षा और प्लास्टिक के सुरक्षित उपयोग को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।