#राजनीति
July 19, 2026
हिमाचल कांग्रेस के पूर्व मंत्री ने छोड़ी राजनीति, सुक्खू सरकार में ओहदा ना मिलने से थे नाराज!
कौल सिंह ठाकुर ने लिया राजनीति से सन्यास, इस संत के सामने जाहिर की इच्छा
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के सबसे अनुभवी राजनेताओं में शुमार कौल सिंह ठाकुर ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। आठ बार विधायक, चार बार मंत्री और दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके कौल सिंह ठाकुर के इस फैसले को हिमाचल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
करीब पांच दशक तक प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाले कौल सिंह ठाकुर ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अब वह राजनीतिक जीवन से दूरी बनाकर आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों की ओर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। उनके इस ऐलान के साथ ही हिमाचल कांग्रेस के एक बड़े राजनीतिक युग के समापन की चर्चा भी तेज हो गई है।
हिमाचल की राजनीति के इस चाणक्य ने अपने संन्यास का ऐलान किसी राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि हरियाणा में धर्मगुरू संत रामपाल के आश्रम में उनके समक्ष किया। आश्रम पहुंचे कौल सिंह ठाकुर ने संत रामपाल को अपना परिचय देते हुए कहा कि मैं आठ बार विधायक रहा, चार बार मंत्री पद संभाला और दो बार कांग्रेस का अध्यक्ष रहा, लेकिन अब मैंने पूरी तरह से रिटायरमेंट ले ली है। इस पर संत रामपाल ने उन्हें अध्यात्म की राह दिखाते हुए कहा कि अब भक्ति में मन लगाओ। इस दौरान कौल सिंह ने संत को गर्मियों में शिमला आने का न्योता दिया और बताया कि वे अपनी पत्नी के साथ नियमित रूप से संत का सत्संग सुनते हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में फिर फटा बादल: किसानों की नगदी फसलें तबाह, नाले में आई बाढ़ से मलबे में बदली सड़क
कौल सिंह ठाकुर के इस बड़े फैसले के पीछे पिछले कुछ वर्षों के सियासी समीकरणों को बेहद अहम माना जा रहा है। कभी सूबे के मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदारों में शुमार रहे कौल सिंह ठाकुर पिछले दो विधानसभा चुनावों में द्रंग विधानसभा क्षेत्र से लगातार हार गए थे। उन्हें भाजपा के प्रत्याशियों से शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : तेज बारिश में हुआ हा.दसा- मरीज को छोड़ने गई AMBULANCE दुर्घटनाग्रस्त, 2 लोग...
इसके साथ ही सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में भी इस कद्दावर नेता को कोई बड़ा ओहदा नहीं मिला। पार्टी के भीतर इस उपेक्षा को लेकर उनके मन में गहरी टीस थी, जिसका रोष वे पहले भी कई मौकों पर खुलकर प्रकट कर चुके थे। माना जा रहा है कि इसी राजनीतिक उपेक्षा और लगातार मिल रही असफलताओं के चलते आखिरकार उन्होंने सियासत से दूरी बनाना ही बेहतर समझा।

संन्यास के ऐलान के साथ कौल सिंह ठाकुर ने यह भी संदेश दिया कि अब राजनीति में नई पीढ़ी को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि लोकतंत्र में समय के साथ नेतृत्व परिवर्तन आवश्यक है और युवा नेताओं को अपनी क्षमता साबित करने का मंच मिलना चाहिए। उनके इस बयान को कांग्रेस संगठन में नेतृत्व के बदलाव और नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें : सावधान हिमाचल! अगले 48 घंटे बेहद भारी, कई जिलों में तेज बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट
कौल सिंह ठाकुर का राजनीतिक जीवन उपलब्धियों और लंबे अनुभव से भरा रहा है। वह आठ बार विधानसभा के लिए चुने गए और प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य, राजस्व, संसदीय कार्य जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे और लंबे समय तक पार्टी की रणनीति निर्धारण में अहम भूमिका निभाते रहे।
हिमाचल की राजनीति में उनका नाम उन नेताओं में शामिल रहा है जिन्होंने गांव-गांव तक अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और दशकों तक जनाधार बनाए रखा। यही कारण है कि उनके संन्यास के फैसले को केवल एक नेता का व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जीवन से अलग होने के संकेत देते हुए कौल सिंह ठाकुर ने अब सामाजिक सेवा और आध्यात्मिक गतिविधियों में अधिक समय देने की इच्छा जताई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में उनकी प्राथमिकता जनसेवा के ऐसे कार्य होंगे जो राजनीति से इतर समाज के लिए उपयोगी साबित हों। उनके इस फैसले के बाद हिमाचल कांग्रेस के भीतर भी नए नेतृत्व को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वहीं, प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे एक कद्दावर नेता के संन्यास से सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

कौल सिंह ठाकुर ने पहले भी वकालत की थी कि नेताओं को 75 साल की उम्र के बाद रिटायर हो जाना चाहिए। अब अपनी बात को अमलीजामा पहनाते हुए उन्होंने इच्छा जताई है कि वे संत रामपाल के साथ जुड़कर सेवाकार्य करना चाहते हैं। कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर वर्तमान में मंडी जिला कांग्रेस की कमान संभाल रही हैं, हालांकि उन्हें भी हालिया चुनावों में पराजय का सामना करना पड़ा था। बहरहाल, कौल सिंह ठाकुर के इस फैसले से हिमाचल प्रदेश की राजनीति का एक बेहद रसूखदार और लंबा सियासी अध्याय अब हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।